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Friday, December 14, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –13)


(भाग – 13)
 बद्रीनाथ धाम की यात्रा -2
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आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व”आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्राआओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा", आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –8) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1"), आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –9) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -2"आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –10) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -3")आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –11) ऊखीमठ की यात्रा" एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –12) बद्रीनाथ धाम की यात्रा -1" में पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. “हर की पौड़ी”, ऋषिकेश, यमनोत्री, बड़कोट, उत्तरकाशी, गंगोत्री यात्रा एवं सिद्ध गुरु बाबा चौरंगीनाथ के मंदिर दर्शन एवं ज्योर्तिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम दर्शन के के साथ ज्योर्तिर्लिंग श्री केदारनाथ जी का रुद्राभिषेक करने के बाद श्री केदारनाथ जी की शीतकालीन निवास स्थल के नैनाभिराम दृश्य एवं विशाल बद्री के दर्शन कर रात में श्री बद्रीनाथ के एक गेस्ट हाउस में रुके.
अब आगे ....

श्री बद्रीनाथ जी का दर्शन सुबह 7 से 8 बजे तक आम जनता के लिए सुलभ है. अन्य सभी तीर्थ स्थल दर्शन से पहले वाली रात को हमलोग जल्दी खाना खा कर सो जाते थे इसलिए सुबह उठने में कभी दिक्कत नहीं हुई. परन्तु कल रात सोने में करीब रात के 11 बजे गए थे अतः देर से उठने के कारण हमलोग सपरिवार सुबह 7:30 बजे मंदिर पहुँच कर दर्शन हेतु कतार में खड़े हुए. सिंह द्वार में प्रवेश करने तक बहुत अव्यवस्था थी परन्तु सभा मंडप के बाद कतार सीधी हो गई और सीधे हमलोग गर्भगृह के प्रवेश द्वार से अंदर गए तो दाहिने तरफ श्री बद्री-विशाल की प्रतिमा देख कर हम सभी अभिभूत हो गए. वहाँ के सेवादार भक्तों को श्री बद्रीनाथ जी का दर्शन के लिए चंद सेकेंड ही देते हैं. हमलोग को भी दर्शन के लिए चंद सेकेंड मिले उसके बाद सेवादारों द्वारा आगे बढ़ने के लिए धकेल दिए गए, परन्तु गर्भगृह बहुत बड़ा था. मूर्ति और दर्शन मंडप के बीच लगभग 12 फीट की जगह थी, तो हमलोग थोड़ा पीछे खड़े हो गए और जी भर कर श्री बद्री-विशाल जी का दर्शन किए. गर्भगृह से बाहर निकलने पर मैंने देखा कि निकास द्वार पर भी भक्तों की कतार लगी थी. बाद में पता चला की यह कतार बुजुर्गों के लिए है, यह अलग बात थी कि अनुचित ढ़ंग से कुछ भक्तों का प्रवेश इस द्वार से हो रहा था, जिसके कारण एक बुजुर्ग वहाँ के सेवादार से उलझ पड़े. खैर ! जब हम गर्भगृह के निकास द्वार से निकले तो सामने श्री महालक्ष्मी मंदिर दिखा. वहाँ महिला भक्तों की भीड़ जमा थी. वहाँ भीड़ होने का मुख्य कारण उस मंदिर के पुरोहित द्वारा रूपए लेकर श्री महालक्ष्मी जी के भेँट किए गए साड़ीयों को देना था. महिला भक्तों को मिली साड़ी की किस्म पुरोहित के हाथ में पड़े रूपए के आधार पर निर्धारित था. मेरी भी पत्नी आशीर्वाद स्वरुप साड़ी को लेने में सफल हुई. हमलोग गर्भगृह का परिकर्मा करने हेतु आगे बढ़े तो अगले भवन में भी विभिन्न प्रकार के मंदिर में भेँट किए गए कपड़े जैसे- धोती, तौलिया, साड़ी, पैन्ट-शर्ट आदि कार्यकर्ताओं द्वारा बेचे जा रहे थे. इसके बाद परिकर्मा कर हमलोग श्री बद्रिनाथ जी का आशीर्वाद एवं प्रसाद ले कर बाहर आ गए. बाहर कल-कल बहती अलकनंदा का सौदर्य अनुपम है. नारद कुंड एवं तप्त कुंड होते हुए अलकनंदा जी की भी एक परिक्रमा हमलोगों ने किया फिर नास्ता कर भारत की आखरी गाँव माणा के लिए रवाना हुए.     

श्री बद्रीनाथ मंदिर के आस पास का प्राकृतिक नज़ारा अद्वितीय है.  श्री बद्रीनाथ धाम को धरती का बैकुंठ भी कहते है. यह मंदिर, नर और नारायण पर्वत के गोद में बसा है जिसके पाँव स्वयं अलकनंदा नदी पखारती रहती हैं. मंदिर के सामने नर पर्वत एवं पार्श्व में नारायण पर्वत जो नीलकंठ पर्वत की चोटी के पीछे है. मंदिर की बाहरी संरचना का वास्तुकला हिन्दू मंदिर वास्तुकला से भिन्न है. मंदिर की खिड़कियाँ, प्रवेश द्वार , दीवारें की संरचना एवं उस पर किए गए चमकीले रंग-रोगन किसी बौद्ध विहार की याद दिलाती है। ऐसे भी कहा जाता है कि 8 वीं शताब्दी तक यह मंदिर बौद्ध विहार बना रहा जब आदिशंकराचार्य ने अलकनंदा नदी से श्री बद्रीनाथ जी की शालिग्राम पत्थर से बनी मूर्ति को निकाला और इसे तप्त कुंड के गर्म झरनों के पास एक गुफा में स्थापित किया। बाद में आदिशंकराचार्य ने बौद्धों को यहाँ से एक परमार शासक राजा कनक पाल की मदद से निष्कासित कर दिया और उसके बाद परमार शासक ने इस मंदिर में मूर्ति को स्थापित किया। मंदिर की वर्तमान संरचना गढ़वाल के राजाओं द्वारा बनाई गई थी। मंदिर में तीन खंड हैं - गर्भगृह, दर्शन मंडप, और सभा मंडप।गर्भगृह में सात मूर्तियाँ हैं . मुख्य मूर्ति भगवान बद्रीनाथ जी का है उनके बायें भाग में छोटी सी मूर्ति नारदजी की है। नारदजी के पृष्ठ भाग में चांदी की दिव्य मूर्ति उद्धव जी की है. नारद जी के बायें भाग मे शंख-चक्र-पद्म धारण किये, पद्मासन के स्थित नारायण भगवान के दर्शन होते हैं। भगवान नारायण के बायें भाग में बाएँ पैर के अंगूठा पर खड़े नर की मूर्ति है. भगवान बदरीनाथजी के दायें भाग में गरुड़जी की मूर्ति है और इनके दायीं तरफ श्री कुबेरजी की मूर्ति है।  

श्री बद्रीनाथ मंदिर के दक्षिणावर्ती परिक्रमा में क्रमानुसार मौजूद प्रमुख्य स्थानों की सूची:

सबसे पहले भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ जी की मूर्ति बद्रीनाथ मंदिर के सिंह द्वार में हैं।हनुमान जी की एक विशाल दक्षिणीमुखी मूर्ति, श्री गणपति जी की मूर्ति, दान-पर्ची कार्यालय, श्री महालक्ष्मी मंदिर, वस्त्र भण्डार, श्री शंकरचार्य जी की गद्दी, प्रसाद विक्रेता, धर्मशिला (भक्त यहां गौ दान करते हैं.)जब भगवान बद्रीनाथ और अन्य देवताओं की मूर्तियां दूध, चंदन, दही, केसर आदि के साथ रावल द्वारा नहाए जाते हैं तो गर्भगृह के पीछे जल को चरणामृत के नाम से जाना जाता है., घंटाकर्ण की मूर्ति (इनको बद्रीनाथ मंदिर के क्षेत्रपाल कहा जाता है.) और अंत में यज्ञ कुंड (भगवान बद्रीनाथ के लिए यज्ञ यहां किया जाता है.)

भगवान् बद्री जी का शीतकालीन निवास जोशी मठ में होता है. स्थानीय भाषा में बद्री का अर्थ बेर है. कहा जाता है कि जब भगवान् विष्णु तपस्या करने के लिए यहाँ आए तो लक्ष्मी जी उनको प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए बेर का पेड़ बन गई तभी से भगवान् विष्णु को बद्रीनाथ कहा जाने लगा. 

शेष  21-12-2018 के  अंक में .................................

इस यात्रा के दौरान नजारों का लुत्फ़ आप नीचे दिए गए चित्रों से लें :


















भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :


आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश)

भाग -4 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा

भाग -5 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा

भाग -6 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन

भाग -7 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा)

भाग -8 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –8) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1 

भाग -9 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –9) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -2

भाग -10 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –10) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -3

भाग -11 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –11) ऊखीमठ की यात्रा

भाग -12 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –12) बद्रीनाथ धाम की यात्रा -1


©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"
  
       

Wednesday, December 12, 2018

FACE OF COMMON MAN - 11



A HANDCART PULLER  AT BIBI JAAN STREET, MOHAMMAD ALI ROAD, MUMBAI

-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Tuesday, December 11, 2018

#Blogger of the Year 2019

#Blogger of the Year 2019


iBlogger की स्थापना अगस्त 2015 में की गई थी. इस ब्लॉग का मकसद विभिन्न पाठ्य ब्लॉगों की जानकारियां एकत्र करना और उन्हे शेयर करना है, ताकि पाठकों को अच्छे ब्लॉगों को पढ़ने के लिए ढूंढ़ना न पड़े। पाठक आसानी से अच्छे ब्लॉगों की जानकारी यहां पर आकर ले सके. इसी कड़ी में iBlogger एक कदम और आगे बढ़ाते हुए "Blogger of the Year 2019" के लिए नामांकन आमंत्रित किया है जिसकी अंतिम तिथि 31 जनवरी 2019 है. 

मैं, "Blogger of the Year 2019" की उपाधि के लिए आदरणीय गोपेश जसवाल जी का नाम प्रस्तावित करता हूँ. इनका ब्लॉग "तिरछी नज़र" जिसका लिंक https://tirchhii-nazar.blogspot.com/ है. इस ब्लॉग पर आकर पाठकों को एक सुखद अनुभूति होती है. इनके हलके-फुलके हास्य किस्सागोई में गंभीर व्यंग समाहित रहता है. समाज में घटित प्रत्येक छोटे-बड़े पहलू पर अपनी तिरछी नज़र से देख कर कविता एवं कहानी में मानवीय संवेदनाओं को भर कर अपनी कृति को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं जिसे पढ़ कर पाठकों के चहरे पर भावों के विभिन्न रंग आना स्वाभाविक है.  आदरणीय गोपेश जसवाल जी किस्सागोई कला में प्रवीण है. मैं इनकी लेखनी के लिए इस पोस्ट के माध्यम से अपना  हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ .

-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Friday, December 7, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 12)


(भाग – 12)
 बद्रीनाथ धाम की यात्रा -1
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आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व”आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्राआओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा", आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –8) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1"), आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –9) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -2"आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –10) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -3") एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –11) ऊखीमठ की यात्रा" में आपने पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. “हर की पौड़ी”, ऋषिकेश, यमनोत्री, बड़कोट, उत्तरकाशी, गंगोत्री यात्रा, सिद्ध गुरु बाबा चौरंगीनाथ के मंदिर दर्शन एवं ज्योर्तिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम दर्शन के के साथ ज्योर्तिर्लिंग श्री केदारनाथ जी का रुद्राभिषेक करने के बाद श्री केदारनाथ जी की शीतकालीन निवास स्थल के नैनाभिराम दृश्य को दिल में सहेज कर विशाल बद्री के दर्शन अर्थात श्री बद्रीनाथ धाम को चल पड़े.
अब आगे .... 

हेलिकॉप्टर प्रकरण के कारण फाटा से ऊखीमठ तक की यात्रा थोड़ी बोझिल लगी परन्तु ओमकारेश्वर मंदिर में प्रवेश करते ही तन-मन में स्फूर्ति आ गई और जब हमलोग श्री बद्रीनाथ धाम को चले तो माहौल को हलका-फुलका बनाने की लिए मेरी धर्मपत्नी मुझसे कहने लगी "अच्छा! सच-सच बताइयेगा कि आपने कैमरा फोटो लेने के लिए ही निकाले थे न." इतना सुनते ही सभी ने ठहाका लगाया और यह वाक्य मेरे कैमरा प्रेम के संदर्भ यदा-कदा अभी भी मजाक के रूप में कहीं न कहीं मेरे श्रीमती जी के द्वारा इस्तेमाल होता है. खैर! ऊखीमठ से श्री बद्रीनाथ धाम की दूरी लगभग 170 कि.मी. है और इस दूरी को तय करने में गूगल बाबा के अनुसार करीब पौने छः घंटे लगने थे. अतः अनुमानतः हमलोग रात को करीब 7 बजे श्री बद्रीनाथ पहुँचना था.  चमचमाती हुई टू-लेन सड़क भी थी और प्राकृतिक नज़ारे भी मनोरम थे. परन्तु जैसे-जैसे हमलोग श्री बद्रनाथ जी के पास पहुँच रहे थे वैसे-वैसे अँधेरा बढ़ता जा रहा था जिसके कारण गाड़ी सावधानी के साथ धीरे-धीरे चलाना पड़ रहा था. बीच-बीच में बच्चों के लघु-शंका के लिए रुकना भी पड़ रहा था. जिसके कारण यात्रा विराम के निर्धारित समय में एक घंटा बढ़ जाने के कारण हमलोग करीब 8 बजे श्री बद्रीनाथ पहुँचे . इतनी लम्बी यात्रा कर सभी थक गए थे. मंदिर जाने के रास्ते पर बैरियर लगा था. एक-दो आदमी ही वहाँ नज़र आ रहे थे. वहाँ से कुछ दूरी पर बहुत सी गाड़ियाँ सड़क के किनारे खड़ी थी. तब मेरे भाई ने कहा "आप और भाभी दर्शन करने जाइए, मैं सपरिवार आपसे सामने दिख रहा पार्किंग के पास मिलूँगा." मैं और मेरी पत्नी वहाँ उतर कर मंदिर के रास्ते पर चल पड़े. अनजान जगह होने के कारण अंधरे में रास्ता का पता भी नहीं चल रहा था. किसी तरह एक राहगीर से पूछ कर फिर आगे बढ़े. कुछ दूर चलने पर दुकाने दिखनी शुरू हो गई और मंदिर के पास पहुँचने पर ऐसा लगा कि श्री बद्रीनाथ की सारी जनता मंदिर के आस-पास ही जमा है. रात में भी दिन जैसा माहौल था. रौशनी से मंदिर के आस-पास का इलाका जगमगा रहा था. अलकनंदा नदी के ऊपर बने पुल को पार कर मंदिर के प्रांगन में प्रवेश करना पड़ता है. पुल पार करने के पहले ही अलकनंदा नदी के किनारे से मंदिर का दर्शन हुआ जिसे देख कर सारी थकान दूर हो गई. 

रात को नौ बजे मंदिर का पट बंद हो जाता है अतः हमलोग जल्दी पुल पार कर सिंह द्वार पहुँचे. वहाँ भीड़ काफी थी परन्तु प्रभु कृपा से हमलोगों मंदिर के दर्शन मंडप से भाव-विभोर हो कर भगवान् का दर्शन किए. हमलोग आपने आप को बहुत भाग्यशाली मान रहे थे कि शादी की सालगिरह पर बाबा केदारनाथ जी एवं भगवान् बद्री विशाल का आशीर्वाद एक साथ मिला. मंदिर में श्री बद्री भगवान् की शयन आरती चल रही थी इसलिए मंदिर के गर्भ-गृह में प्रवेश नहीं मिल पाया. 

हमलोग प्रसाद लेकर वापस लौटे परन्तु अँधेरा होने के कारण जिस रास्ते से आए थे वो पता नहीं चला परन्तु किसी से पूछ कर आगे बढ़ने पर हमलोग पुराने रास्ते पर आ गए. रास्ते में एक यात्री निवास दिखा तो वहाँ पर गए और कमरे को खुलवाकर देखा जो रहने लायक था, तो हमदोनों ने सोचा आज रात यहीं पर रुकेंगे. हमलोग बैरियर पार कर जब कार पार्किंग के तरफ बढ़े तो अपनी कार कहीं नज़र नहीं आ रही थी. हमलोग आगे बढ़ते गए श्री बद्रीनाथ का बस स्टैंड भी गुजर गया. सुनसान जगह थी हमें लग रहा था कि कहीं हमलोग दूसरी दिशा की तरफ तो नहीं बढ़ रहें हैं. नेटवर्क नहीं मिलने के कारण फोन भी नहीं लग रहा था. रात के करीब दस बजने वाले थे. हमदोनों फिर से बैरियर के तरफ चल पड़े अभी बैरियर के पास ही पहुँचे थे कि भाई की गाड़ी सामने से आती दिखाई दी तो जान में जान आई. भाई ने बताया कि बच्चों को टॉयलेट जाना था इस लिए पास के एक गेस्ट हाउस में पाँच बेड का कमरा ले लिया है. हमलोग भी फ्रेश हो कर रात का खाना खाया और सो गए.    
शेष  14-12-2018 के  अंक में .................................

इस यात्रा के दौरान नजारों का लुत्फ़ आप नीचे दिए गए चित्रों से लें :






भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :


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एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा

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©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"       

Wednesday, December 5, 2018

MEME SERIES - 21


Biweekly Edition (पाक्षिक संस्करण) 05 Dec'2018 to 18 Dec'2018

मीम (MEME)

"यह एक सैद्धांतिक इकाई है जो सांस्कृतिक विचारों, प्रतीकों या मान्यताओं आदि को लेखन, भाषण, रिवाजों या अन्य किसी अनुकरण योग्य विधा के माध्यम से एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में पहँचाने का काम करती है। "मीम" शब्द प्राचीन यूनानी शब्द μίμημα; मीमेमा का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ हिन्दी में नकल करना या नकल उतारना होता है। इस शब्द को गढ़ने और पहली बार प्रयोग करने का श्रेय ब्रिटिश विकासवादी जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिंस को जाता है जिन्होने 1976 में अपनी पुस्तक "द सेल्फिश जीन" (यह स्वार्थी जीन) में इसका प्रयोग किया था। इस शब्द को जीन शब्द को आधार बना कर गढ़ा गया था और इस शब्द को एक अवधारणा के रूप में प्रयोग कर उन्होने विचारों और सांस्कृतिक घटनाओं के प्रसार को विकासवादी सिद्धांतों के जरिए समझाने की कोशिश की थी। पुस्तक में मीम के उदाहरण के रूप में गीत, वाक्यांश, फैशन और मेहराब निर्माण की प्रौद्योगिकी इत्यादि शामिल है।"- विकिपीडिया से साभार.

MEME SERIES - 21

By looking at this picture you might be having certain reaction in your mind, through this express your reaction as the title or the  caption. The selected title or caption of few people will be published in the next MEME SERIES POST.

इस तस्वीर को देख कर आपके मन में अवश्य ही किसी भी प्रकार के प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई होगी, तो उसी को शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)के रूप में व्यक्त करें। चुने हुए शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)को अगले MEME SERIES POST में प्रकाशित की जाएगी।

कतार !
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The next edition will be published on  DECEMBER 19, 2018. If you have similar type of picture on your blog, leave a link of your post in my comments section. I will link your posts on my blog in the next edition. Thank you very much dear friends for all your valuable captions for MEME SERIES-20 . Your participation and thoughts are deeply appreciated by me. Some of the best captions are listed below.

अगला संस्करण 19 दिसम्बर , 2018 को प्रकाशित किया जाएगा। यदि आपके ब्लॉग पर इस तरह की कोई तस्वीर है, तो अपने पोस्ट का लिंक मेरी टिप्पणी अनुभाग में लिख दें। मैं अगले संस्करण में अपने ब्लॉग पर आपका पोस्ट लिंक कर दूंगा। मेरे प्रिय मित्रों, आपके सभी बहुमूल्य शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION) के लिए धन्यवाद। MEME SERIES-20 के पोस्ट पर आपकी भागीदारी और विचारों ने मुझे बहुत प्रभावित किया, उनमें से कुछ बेहतरीन कैप्शन नीचे उल्लेखित हैं। 


MEME SERIES-20 के बेहतरीन कैप्शन



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किरदार के साथ बदलता लिबास.......................................................sweta sinha
जैसा देश वैसा भेष.........................................................................Abhilasha Chauhan
छोड़ आये हम वो दुनिया चलें आज ले नया ढंग।..................................Kusum Kothari

कौआ चला बनने को हंस
दोनो लटक गये बीच में 
बन गया मामा कंस। ....................................................  ..............सुशील कुमार जोशी (SKJoshi)


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