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Sunday, November 11, 2018

मित्र मंडली -95



मित्रों , 
"मित्र मंडली" का  पंचानवे वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 05.11.2018  से 11.11.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : https://rakeshkirachanay.blogspot.com/p/blog-page_25.html मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -95  

इस अंक के आठ रचनाकार 

अभिलाषा चौहान जी 

अनु की दुनिया : भावों का सफ़र

अनु अन्न लागुरी  जी 

श्वेता सिन्हा जी 

"गज़ल के माध्यम से जीवन से जुड़ी कड़वी सच्चाई को व्यक्त करती बेहतरीन शेर।  सुंदर प्रस्तुति।"

लिखा हुआ रंगीन भी होता है रंगहीन भी होता है बस देखने वाली आँखों को पता होता है


सुशील कुमार जोशी  जी 



पूजा की थाली तुलसी का पत्ता हैं माँ.....!!!


ज़नाब जफ़र ऐरोली 

"सभी उम्मीदों की आसरा है माँ, सुंदर जज्बातों से लबरेज़ शेरों से सजी एक बे-मिसाल गज़ल।  आप भी आनंद लें।  सुंदर प्रस्तुति।

भौतिक विकास

रवींद्र सिंह यादव जी 


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा । आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 19-11-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

Friday, November 9, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 8)


(भाग – 8)
 श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1
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आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व”आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्राआओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा) में पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. “हर की पौड़ी”, ऋषिकेश, यमनोत्री, बड़कोट, उत्तरकाशी एवं गंगोत्री यात्रा की खट्टे-मिठ्ठे यादों को दिल में सहेज कर अपने अगले पड़ाव श्री केदारनाथ धाम की यात्रा करने हेतु रात्रि विश्राम के लिए अपने-अपने बिस्तर पर सो गए.  
अब आगे ....

गंगोत्री से लौटने पर होटल में चोर को रंगे हाथ पकड़ने के बाद सभी की नींद उड़ गई थी. हम सभी उसी घटना पर देर रात तक चर्चा करते रहे और ईश्वर को लाख-लाख धन्यवाद दे रहे थे कि चोर ने जिस पर्स को उठाया था उसके पास ही एक छोटा पर्स था जिसमें यात्रा के दौरान खर्च के लिए रूपए थे, वो बच गए. सुबह गौरीकुंड (केदारनाथ) यात्रा प्रारंभ करने में विलंब हो गया और हमलोग ने गौरीकुंड के लिए प्रातः 7:30 अपनी यात्रा शुरू की. उत्तराखंड की सड़कों पर निजी वाहनों से यात्रा करने का अपना एक अलग आनंद है. बिना गड्ढों की सड़कें, सड़कों पर बहुत कम सवारी गाड़ी, कहीं-कहीं पर सर्पीले रास्ते, रास्तों के एक तरफ खाई, खाई के बीच में बलखाती नदी, सड़क की दूसरी तरफ ऊँचे-ऊँचे पहाड़, पहाड़ पर लम्बे-लम्बे पेड़, कभी-कभी सड़क के ठीक सामने पहाडो की चोटी, पहाड़ को आलिंगन करता बादलों के छोटे-छोटे समूह और बादलों का अनेकों बड़े-बड़े समूह पहाड़ों के सिरमौड़ को देखना एक अलौकिक अनुभव होता है. कुछ इसी प्रकार की यात्रा का आनंद हमलोग एक घंटा से ले रहे थे. तभी हमलोगों को चौरंगी खाल का बोर्ड दिखा. यह स्थल चौरंगीनाथ बाबा का मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो नाथ संप्रदाय की परंपरा के सिद्ध योगी हैं और गुरु गोरखनाथ जी की शिष्य परंपरा से जुड़े हैं। मेरे इस छोटे चार धाम यात्रा में यह स्थल सम्मलित नहीं था परन्तु जब हमलोग उत्तरकाशी से केदारनाथ जी की यात्रा के लिए निकले तो वहाँ के एक स्थानीय व्यक्ति ने इस स्थल की जानकारी दी और साथ में नचिकेता ताल के बारे में भी बताया. घने  देवदार और ओक (बलूत) के जंगलों के बीच स्थित चौरंगी खाल एक रमणीय स्थल है और वहाँ जाकर सुबह-सुबह चौरंगी नाथ जी का दर्शन कर गरमा-गर्म आलू के पराठे, बच्चों के लिए मैगी का नास्ता और उसके साथ मीठे रसीले आम का स्वाद आंखों के साथ-साथ उदर को तृप्त करने में सक्षम थे. हमलोगों ने इसका भरपूर लाभ उठाया . यहाँ से नचिकेता ताल जाने के लिए लगभग 3 कि.मी. पैदल मार्ग था और इतना भोजन कर लेने के बाद पैदल चलने की इच्छा किसी की नहीं हो रही थी. अब तक की यात्रा में दूरी के लिहाज से दूसरा सबसे लम्बा रास्ता हमें तय करनी थी, अतः हमलोग वहाँ से गौरीकुण्ड के लिए रवाना हो गए.





हमलोग रास्ते में केवल दिन का खाना खाने के लिए रुके. उसके बाद जो सड़क हमलोगों को मिला वह अभी तक के रास्तों में सबसे ख़राब एवं खतरनाक रास्ता था और लगभग पाँच कि.मी. के बाद गुप्तकाशी आया तब जा कर सडकों की हालत में सुधार हुई. गुप्तकाशी से श्री केदारनाथ जी के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो जाती है और आसमान में हेलिकॉप्टर दिखना सामान्य बात है. आसमान में उड़ते हुए हेलिकॉप्टर को देख कर बच्चे हेलिकॉप्टर की सवारी करने के लिए जिद करने लगे थे. हमलोगों ने उनकी मांगों को अनदेखा कर आगे बढ़ने लगे. अभी कुछ ही दूर गए थे कि रास्ते के बिलकुल सटे एक हेलीपैड और उसका बुकिंग ऑफिस दिखा, तो जिज्ञासावश वहाँ उतार कर कल के लिए वन-वे  केदारनाथ के लिए टिकट की उपलब्धता पता करने लगे, तो उन्होंने कहा कि जाने एवं आने के लिए टिकट तो अभी मिल जाएगा परन्तु वन-वे  के लिए कल ही बता पाएंगे. वहाँ पता चला कि जिस हेलिकॉप्टर सेवा की ऑनलाइन बुकिंग हमलोग यात्रा शुरू करने से पहले कर रहे थे उससे लगभग 2000 रु. कम में आने-जाने का टिकट मिल रहा था. यहाँ एक बात का जिक्र करना जरूरी है कि इस यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अग्रिम बुकिंग हमने नहीं की थी, इसका मुख्य कारण यह था कि छोटा चार धाम यात्रा में मौसम के कारण यात्रा में बाधा से नियत समय पर ना पहुँचना. खैर! हमलोग टिकट का पता कर आगे बढ़े और करीब 7 बजे शाम को फाटा पहुँचे. अँधेरा होने वाला था और आंशिक रूप से हमलोगों का इरादा एक तरफ की यात्रा हेलिकॉप्टर द्वारा करने का हो चुका था तो हमलोग फाटा के एक होटल में रात्रि विश्राम के लिए रुक गए.

इस यात्रा के दौरान नजारों का लुत्फ़ आप नीचे दिए गए चित्रों से लें :











शेष  16-11-2018 के  अंक में .................................

भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :


आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश)

भाग -4 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा

भाग -5 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा

भाग -6 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन

भाग -7 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा)

©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, November 7, 2018

MEME SERIES - 19


Biweekly Edition (पाक्षिक संस्करण) 07 Nov'2018 to 20 Nov'2018

मीम (MEME)

"यह एक सैद्धांतिक इकाई है जो सांस्कृतिक विचारों, प्रतीकों या मान्यताओं आदि को लेखन, भाषण, रिवाजों या अन्य किसी अनुकरण योग्य विधा के माध्यम से एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में पहँचाने का काम करती है। "मीम" शब्द प्राचीन यूनानी शब्द μίμημα; मीमेमा का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ हिन्दी में नकल करना या नकल उतारना होता है। इस शब्द को गढ़ने और पहली बार प्रयोग करने का श्रेय ब्रिटिश विकासवादी जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिंस को जाता है जिन्होने 1976 में अपनी पुस्तक "द सेल्फिश जीन" (यह स्वार्थी जीन) में इसका प्रयोग किया था। इस शब्द को जीन शब्द को आधार बना कर गढ़ा गया था और इस शब्द को एक अवधारणा के रूप में प्रयोग कर उन्होने विचारों और सांस्कृतिक घटनाओं के प्रसार को विकासवादी सिद्धांतों के जरिए समझाने की कोशिश की थी। पुस्तक में मीम के उदाहरण के रूप में गीत, वाक्यांश, फैशन और मेहराब निर्माण की प्रौद्योगिकी इत्यादि शामिल है।"- विकिपीडिया से साभार.

MEME SERIES - 19

By looking at this picture you might be having certain reaction in your mind, through this express your reaction as the title or the  caption. The selected title or caption of few people will be published in the next MEME SERIES POST.

इस तस्वीर को देख कर आपके मन में अवश्य ही किसी भी प्रकार के प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई होगी, तो उसी को शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)के रूप में व्यक्त करें। चुने हुए शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)को अगले MEME SERIES POST में प्रकाशित की जाएगी।

कुशल कामगार करे, सुरक्षित निर्माण कार्य !
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The next edition will be published on  NOVEMBER 21, 2018. If you have similar type of picture on your blog, leave a link of your post in my comments section. I will link your posts on my blog in the next edition. Thank you very much dear friends for all your valuable captions for MEME SERIES-18 . Your participation and thoughts are deeply appreciated by me. Some of the best captions are listed below.

अगला संस्करण 21 नवंबर , 2018 को प्रकाशित किया जाएगा। यदि आपके ब्लॉग पर इस तरह की कोई तस्वीर है, तो अपने पोस्ट का लिंक मेरी टिप्पणी अनुभाग में लिख दें। मैं अगले संस्करण में अपने ब्लॉग पर आपका पोस्ट लिंक कर दूंगा। मेरे प्रिय मित्रों, आपके सभी बहुमूल्य शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION) के लिए धन्यवाद। MEME SERIES-18 के पोस्ट पर आपकी भागीदारी और विचारों ने मुझे बहुत प्रभावित किया, उनमें से कुछ बेहतरीन कैप्शन नीचे उल्लेखित हैं। 


MEME SERIES-18 के बेहतरीन कैप्शन



चलना ही है जिंदगी 
मै थमी थमी जिंदगी।...........................................................................Kusum Kothari
मैं अलबेली चली अकेली, ये पहाड़ियां मेरी सहेली......................................Abhilasha Chauhan
मुझे चलते जाना है...। .........................................................................Sweta sinha


Sunday, November 4, 2018

मित्र मंडली -94




मित्रों , 
"मित्र मंडली" का  चौरानवे वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 29.10.2018  से 04.11.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : https://rakeshkirachanay.blogspot.com/p/blog-page_25.html मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -94  

इस अंक के पाँच रचनाकार 

अभिलाषा चौहान जी 

मन की गति विरला ही जाने

कुसुम कोठारी जी 

नंगा सच

सुप्रिया पाण्डेय   जी 

"सच और झूठ का द्वन्द खुद के अंदर स्वतः चलता रहता है। मानव मन सदैव झूठ के मायाजाल में फँसने को उतावला रहता है उसके आकर्षण में बंधना चाहता है परन्तु झूठी जीवन शैली को नकारती एवं सत्य के प्रति अपना नेह बनाए रखने की शिक्षा देती सुंदर रचना। सच को बेशर्म बेहया,बदसूरती,नग्नता और बिंदास जैसे शब्दों के साथ जोड़ना शायद कवियत्री की समाज में फैली आराजकता का परिणाम है फिर भी वह टूटती नहीं हैं और सच के साथ सदैव खड़े रहने का संदेश देती हैं। मन को उद्वेलित करती प्रस्तुति।"

अपना कहाँ ठिकाना है ?

मीना शर्मा जी 

प्रकृति को आने दो घर-द्वार

रवींद्र सिंह यादव जी 



आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा । आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 12-11-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....