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Wednesday, October 17, 2018

फोटोग्राफी : पक्षी 63 (Photography : Bird 63)


Photography: (dated 04 09 2018 06:15 AM )

Place : Tisa, Vill- Chachoga, Himachal Pradesh, India

Himalayan Bulbul

The Himalayan bulbul , or white-cheeked bulbul, is a species of songbird in the bulbul family found in central Asia. Its head, throat, and crest are black and white. The backside, and lengthy tail are brown, the underside is pale yellow.
White-Cheeked Himalayan Bulbul is the national bird of Bahrain.


Scientific name:  Pycnonotus leucogenys
Photographer :   Rakesh kumar srivastava

हिमालयी बुलबुल  या सफेद-गाल वाली बुलबुल, मध्य एशिया में पाए जाने वाले बुलबुल परिवार में सॉन्गबर्ड प्रजाति का एक पक्षी है। इसका सिर, गले और कलग़ी, काले और सफेद रंग के होते हैं। पीठ और लंबी पूंछ भूरे रंग के होते हैं और पेट निचला हिस्सा पीले रंग का होता है।

यह बहरीन का राष्ट्रीय पक्षी है।

वैज्ञानिक नाम: पिकोनोटोटस ल्यूकोजेनीस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम :-



Gujarati: કનરા બુલબુલ; Nepali: तार्के जुरेली; Tamil: இமயமலை சின்னான்; 
Bhojpuri: हिमालयी बुलबुल  ; Hindi: हिमालयी-पहाड़ी-बुलबुल 









©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"


Monday, October 15, 2018

मित्र मंडली -91



मित्रों , 
"मित्र मंडली" का  इकानवे  वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 08.10.2018  से 14.10.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -91  


(नोट : मेरे कई ब्लॉग अनुसरणकर्ता  मित्र का पोस्ट जो मुझे बहुत अच्छा लगता है परन्तु मैं उसे मित्र मंडली में सम्मलित नहीं करता क्यूंकि उनकी रचना पहले से ही लोकप्रिय होती है और समयाभाव के कारण मैं उनके पोस्ट पर टिप्पणी  भी नहीं कर पाता हूँ, इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।), 

इस सप्ताह के पाँच रचनाकार 



तितली तूफ़ान


https://www.hindi-abhabharat.com.xn----ztd4gfj7aay8etcbep4p.com/2018/10/blog-post13.html


फुरसत की फितरत में ही नहीं होती है फुरसत फितरत और फुरसत से साहित्य भी नहीं बनता है



सुशील कुमार जोशी  जी


#Me Too

पंकज भूषण पाठक जी

जब किसी से कोई गिला रखना ...

 शशि गुप्ता जी 

"गृहस्थ, विरक्त और संत को अगर कोई आत्मसात किया तो मेरी नज़र में तुलसीदास जी हैं और बहुत हद तक यह लेख भी इस अनुभूति को व्यक्तिगत रूप से आत्मसात किया हुआ है, थोड़ा सा संशय है तो गृहस्थ होने के व्यक्तिगत अनुभव में . अवलोकन के आधार पर आप केवल अनुमान ही लगा सकते हैं . लेख में इमानदारी से लिखी व्यक्तिगत अनुभवों से आप भी लाभ लें ."

आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा । आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 22-10-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....






Friday, October 12, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)


(भाग – 4)
लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा







आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व” एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) में पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. रास्ते में लकड़ी माफ़िया का कारवाँ देख कर जंगल एवं पहाड़ों की दुर्दशा का कारण सहज ही समझ में आ रहा था. हरिद्वार में यातायात समस्या से दो-चार होते हुए सुबह 6:30 बजे “हर की पौड़ी” पहुँचे और गंगा स्नान एवं शाम की आरती देख कर सहज ही मन में भक्ति भाव की लहरें उमड़ रही थी. “हर की पौड़ी” की मनोरम दृश्य को दिल में सहेज कर यात्रा का  अगला पड़ाव बड़कोट जाने का सपना लिए हम  सभी अपने-अपने बिस्तर पर सो गए.      
अब आगे ....

सुबह 5: 30 बजे हमलोग बड़कोट के लिए रवाना हो गए. इससे दो फायदा हुआ एक तो हरिद्वार से “हर की पौड़ी” के बीच की वाहनों की भीड़ से बच गए और हमें अतिरिक्त दो घंटे मिले जिसमें ऋषिकेश का संक्षिप्त भ्रमण हो सका. तो हमलोगों का पहला पड़ाव ऋषिकेश था. हमलोग करीब 6:30 बजे ऋषिकेश पहुँचे. लक्ष्मण झुला से लगभग एक किलोमीटर पहले कार पार्किंग में कार खड़ी की कार पार्किंग के पीछे गंगा बह रही थी. गंगा के शीतल जल को छू कर आने वाली सुबह की हवा, मन-मस्तिष्क में आनंद संचार कर रही थी. कुछ समय वहाँ बिताने के बाद 7 बजे हमलोग लक्ष्मण झुला देखने पहुँचे. रास्ते में एक चौक पर श्री लक्ष्मण जी  की आदम कद प्रतिमा लगी हुई थी जो बरबस सभी को आकर्षित कर रही थी .



लक्ष्मण झुला जाते समय एक रास्ता गंगा किनारे जा रहा था. नदी के किनारे छोटे-बड़े पत्थर फैले हुए थे और कहीं पत्थरों के ढेर लगे हुए थे. नदी के बीच कुछ लोग राफ्टिंग का आनंद ले रहे थे. नदी के दोनों तटों पर पुरुष, महिलाएँ एवं बच्चे जल-क्रीड़ा का आनंद ले रहे थे. हम सभी भी गंगा की मंद गति से बहते  जल और मंद गति से बहती शीतल हवा के प्रभाव में आकर वहाँ पहुँचने के लिए उतावले हो रहे थे. परन्तु हमलोगों ने खुद को समझाया कि पहले हमलोग लक्ष्मण झुला देखेंगे उसके बाद आस-पास के  मंदिरको  देख  कर लौटेंगे फिर यहाँ आकर मस्ती करेंगे.

कुछ ही देर में गंगा नदी के दोनों किनारों पर दो-दो स्तम्भ एवं लोहे के रस्सियों पर टिका एवं हवा में लटका हुआ विशाल सेतु हमलोगों के सामने था. सेतु के दुसरे छोड़ पर, बायीं तरफ एक बहुमंजिला पिरामिड के आकार का भव्य "तेरा मंजिला मंदिर", सेतु के नीचे बहती गंगा नदी और पहाड़ी से घिरा यह सेतु, सभी मिलकर अनुपम छटा बिखेर रहे थे और सभी तीर्थ यात्री कुछ पल के लिए ठिठक कर  रुकते और इस नयनाभिराम स्थल को अपलक देख हुए सेतु की तरफ बढ़ते. सेतु, झूले जैसा लगता है जब आप इस सेतु से गुजरते है और रामायण काल में श्री लक्ष्मण जी जूट के रस्सी से बने सेतु से गंगा जी को पार किया था. इसलिए इसका नाम लक्ष्मण झुला पड़ा. सेतु को पार करते ही शंकर जी की मूर्ति चौक पर विराजमान मिलती है. आस-पास के मंदिर दर्शन कर हमलोग आधा घंटा गंगा नदी के लहरों के साथ मौज-मस्ती कर बड़कोट के लिए प्रस्थान किए तो रास्ते में राम झुला दिखा जिसका रामायण काल से कोई लेना-देना नहीं है. आइए आप लोग यहाँ की झलकियाँ तस्वीरों के माध्यम से देखें :








हमलोगों का काफिला राम झुला का दर्शन कर आगे बढा तो ऋषिकेश में सैलानियों का हुजूम चारों तरफ मौजूद था परन्तु  सब के मकसद अलग-अलग थे . कोई गर्मी से निजात पाने के लिए, तो कोई एड्वेंचर के लिए, कोई प्रकृति का नज़ारा लेने के लिए, तो कोई  तीर्थ यात्रा के लिए और कुछ विदेशी सैलानी भारत को जानने के लिए. खैर! कुछ दुर  भीड़-भाड़ का नज़ारा देखने को मिला. उसके बाद भीड़-भाड़ से निजात मिल गई  और  हमारी कार  चमकते हुई चौड़ी सड़कों पर सरपट भागने लगी, लगा ही नहीं कि हम दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ रहें हैं. वहाँ की सड़कें जी.टी. रोड जैसी   लग रही  थी  और उस पर सुविधा यह कि टोल टैक्स भी नहीं देना पड़ रहा था.



हमलोग एक घंटे के बाद रास्ते में टी-ब्रेक लिए और दोपहर के भोजन के लिए चंबा में रुके. 
चंबा होटल के पीछे का दृश्य 


अखरोट का पेड़ 

हरा अखरोट 

जब हमलोग धरासू से बड़कोट के तरफ जैसे ही मुड़े थे कि मौसम अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया. अचानक काले बादलों  ने पहाड़ों को चारों तरफ से  घेर लिया और सामने जो सड़क दिखी वो दिल दहलाने केलिए काफी थी. सड़क के नाम पर पत्थर एवं गड्ढ़े थे. सड़क निर्माण का कार्य अभी शुरू ही हुआ  था . करीब दो किलोमीटर हमलोगों की कार रेंगती हुई आगे बढ़ रही थी. खास्ता हाल सड़क एवं बूंदा-बांदी के कारण, हम सभी भगवान् से प्रार्थना कर रहे थे कि किसी तरह हमलोग बड़कोट पहुँच जाए. मुसलाधार बारिश हो रही थी परन्तु सड़कें अब अच्छी थी. कुछ देर के बाद मौसम और अधिक ऊचाई के कारण बच्चों को उल्टी और अचानक से ठंड लगने लगी. हमलोग घबड़ा गए. अभी भी बड़कोट पहुँचने में आधा घंटा लगना था, तभी अचानक एक छोटा पत्थर हमलोगों के कार के आगे गिर कर लुढ़कता हुआ गहरे खाई में चला  गया. भगवान्-भगवान् करते हुए करीब 7 बजे हमलोग  बड़कोट पहुँचे. जहाँ पर पहला होटल दिखा  हमलोग वहीं  रूक गए. जहाँ हमलोग रुके थे वहाँ से दाहिने तरफ यमनोत्री का रास्ता था और सीधा दो किलोमीटर पर बड़कोट क़स्बा था. हम सब असमंजस में थे कि बड़कोट क़स्बा चलें या यहीं पर रुकें. रास्ते में फर्स्ट-एड किट से उल्टी की दवा देने से बच्चों की स्थिति अब सामान्य लग रही थी. तब हमलोगों ने निर्णय लिया कि अभी यहीं रुकते है. बच्चे को आराम की आवश्यकता है और ख़ुदा न करे अगर तबियत ख़राब हुई तो कार से जाकर बच्चे को किसी डॉक्टर से दिखा लेंगे और अगर तबियत ज्यादा ख़राब हुई तो आगे की यात्रा नहीं करेंगे. कुछ देर आराम करने के बाद बच्चे फिर से सामान्य हुए तब जाकर सभी ने खाना खाया और बच्चे सो गए. 




बड़कोट होटल के पीछे का दृश्य 
शेष  19-10-2018 के  अंक में .................................

भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश)

©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, October 10, 2018

MEME SERIES - 17


Biweekly Edition (पाक्षिक संस्करण) 10 Oct'2018 to 23 Oct'2018

मीम (MEME)

"यह एक सैद्धांतिक इकाई है जो सांस्कृतिक विचारों, प्रतीकों या मान्यताओं आदि को लेखन, भाषण, रिवाजों या अन्य किसी अनुकरण योग्य विधा के माध्यम से एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में पहँचाने का काम करती है। "मीम" शब्द प्राचीन यूनानी शब्द μίμημα; मीमेमा का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ हिन्दी में नकल करना या नकल उतारना होता है। इस शब्द को गढ़ने और पहली बार प्रयोग करने का श्रेय ब्रिटिश विकासवादी जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिंस को जाता है जिन्होने 1976 में अपनी पुस्तक "द सेल्फिश जीन" (यह स्वार्थी जीन) में इसका प्रयोग किया था। इस शब्द को जीन शब्द को आधार बना कर गढ़ा गया था और इस शब्द को एक अवधारणा के रूप में प्रयोग कर उन्होने विचारों और सांस्कृतिक घटनाओं के प्रसार को विकासवादी सिद्धांतों के जरिए समझाने की कोशिश की थी। पुस्तक में मीम के उदाहरण के रूप में गीत, वाक्यांश, फैशन और मेहराब निर्माण की प्रौद्योगिकी इत्यादि शामिल है।"- विकिपीडिया से साभार.

MEME SERIES - 17

By looking at this picture you might be having certain reaction in your mind, through this express your reaction as the title or the  caption. The selected title or caption of few people will be published in the next MEME SERIES POST.

इस तस्वीर को देख कर आपके मन में अवश्य ही किसी भी प्रकार के प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई होगी, तो उसी को शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)के रूप में व्यक्त करें। चुने हुए शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)को अगले MEME SERIES POST में प्रकाशित की जाएगी।

WHERE IS MY WAY?
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The next edition will be published on  OCTOBER 24, 2018. If you have similar type of picture on your blog, leave a link of your post in my comments section. I will link your posts on my blog in the next edition. Thank you very much dear friends for all your valuable captions for MEME SERIES-16 . Your participation and thoughts are deeply appreciated by me. Some of the best captions are listed below.

अगला संस्करण 24 अक्टूबर , 2018 को प्रकाशित किया जाएगा। यदि आपके ब्लॉग पर इस तरह की कोई तस्वीर है, तो अपने पोस्ट का लिंक मेरी टिप्पणी अनुभाग में लिख दें। मैं अगले संस्करण में अपने ब्लॉग पर आपका पोस्ट लिंक कर दूंगा। मेरे प्रिय मित्रों, आपके सभी बहुमूल्य शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION) के लिए धन्यवाद। MEME SERIES-16 के पोस्ट पर आपकी भागीदारी और विचारों ने मुझे बहुत प्रभावित किया, उनमें से कुछ बेहतरीन कैप्शन नीचे उल्लेखित हैं। 


MEME SERIES-16 के बेहतरीन कैप्शन

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पक्के रास्ते किसलिये? खेतों के बीच से चलिये.....................................सुशील कुमार जोशी (SKJoshi)
जुगाड़, जुगाडु और जुगाड़ से चलता देश मेरा......................................Abhilasha Chauhan
"जुगाड़" ......................................................................................yashoda agrawal
"नई पीढी पुराने खेल,चल मेरी गड्डी ठेलमठेल".....................................Sudha Devrani