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Monday, August 20, 2018

मित्र मंडली -83




मित्रों , 
"मित्र मंडली" का  तिरासी  वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 13.08.2018  से 19.08.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -83    
(नोट : मेरे कई ब्लॉग अनुसरणकर्ता  मित्र का पोस्ट जो मुझे बहुत अच्छा लगता है परन्तु मैं उसे मित्र मंडली में सम्मलित नहीं करता क्यूंकि उनकी रचना पहले से ही लोकप्रिय होती है और समयाभाव के कारण मैं उनके पोस्ट पर टिप्पणी  भी नहीं कर पाता हूँ, इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।), 

इस सप्ताह के छः रचनाकार 

मिलिए मित्र मंडली के नए सदस्य से 

कैसे गुजरी रात याद नही रहता

ज़नाब जफ़र ऐरोली 

ऋतु परिवर्तन

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा जी 

पश्चाताप

रवींद्र सिंह यादव जी 


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा । आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 27-08-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

Saturday, August 18, 2018

माँ नैना देवी मंदिर की यात्रा


माँ नैना देवी मंदिर की यात्रा 




अभी तक आपने भाखड़ा-नंगल बहुउद्देश्यीय बाँध यात्रा के बारे में पढ़ा, अब आगे.......

मेरी श्रीमती जी को ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन करने में कोई ज्यादा दिलचस्पी नहीं हैं। चूँकि मैंने पहले ही उनको समझा दिया था कि भाखड़ा-नंगल बाँध, माँ नैना देवी मंदिर जाने के रास्ते में पड़ता है और वहाँ ज्यादा समय भी नहीं लगा, इसलिए यात्रा बिना किसी विवाद के गोबिंद सागर झील के सौंदर्य को निहारते हुए आराम से कट रही थी।

भाखड़ा-डैम से माता नैना देवी जी के मंदिर की दूरी 23.6 कि.मी. थी। भाखड़ा-डैम से माता नैना देवी जी के लिए रोप-वे का प्रवेश द्वार 19.5 कि.मी.पर है और यहाँ से कुछ ही दूरी पर माँ नैना देवी की चढ़ाई का प्रवेश द्वार है। पहले यहाँ से 1.25 कि.मी. की चढ़ाई पैदल, पालकी या अन्य साधन से तय की जाती थी परन्तु अब वाहन सीधे ऊपर तक पहुँच जाती है। उसके बाद लगभग 300 मी. की चढ़ाई पैदल, पालकी या अन्य साधन से तय की जाती है।

सुबह 11 बजे  भाखड़ा-डैम से माता नैना देवी जी की यात्रा के लिए निकल पड़े। सुबह 11:30 बजे हमलोग रोप-वे के पास पहुँच गए।  थोड़ी दुविधा थी कि हमलोगों की कार नैना देवी की पहाड़ी पर चढ़ पाएगी की नहीं। बच्चे रोप-वे से जाना चाहते थे और मेरा भाई अपना ड्राइविंग कौशल दिखाना चाहता था। अंत में वही होता है जिसके कब्जे में  कार की स्टीयरिंग होती है और कार पहाड़ों पर चढ़ने लगी।  चंद मिनटों में  हमलोग माँ नैना देवी की चढ़ाई के प्रवेश द्वार पर पहुँच गए।  परन्तु ये क्या ? वहाँ कारों की कतार प्रवेश के लिए उलटी दिशा से लगी हुई थी क्योंकि प्रवेश के लिए  यहाँ पर U टर्न लेना पड़ता है और  ऊपर के कण्ट्रोल रूम से आदेश मिलने पर ही ट्रैफिक पुलिस के आदेश पर सिमित संख्या में वाहनों को ऊपर जाने दिया जाता है । हमारी भी कार प्रवेश के इंतज़ार में खड़ी हो गई।  अभी तक सब सही चल रहा था परन्तु  चिंता थी तो आंनदपुर साहिब पहुँचने की। एक घंटे के इंतज़ार के बाद हमें प्रवेश के लिए हरी झंडी मिली। तो अब  पहाड़ की चढ़ाई का इम्तिहान शुरू हो गया ।  एक तो खड़ी और घुमावदार चढ़ाई , उस पर से ऊपर से उतरने वाले स्थानीय व्यावसायिक ड्राइवरों  का आतंक। सोने पर सुहागा ये कि सामने से आ रही पी.डब्लू.डी. की कार्यरत बुलडोज़र का ड्राइवर, मेरे भाई की  ड्राइविंग कौशल की जाँच के लिए उसे पहाड़ के एक खोह में घुसने को कह रहा था जिससे उसकी गाड़ी नीचे की तरफ जा सके। बड़ी मुश्किल से कार को आगे-पीछे कर के उस खोह में गाडी खड़ी हो पाई जिससे बुलडोज़र निकल पाया। परन्तु ये क्या ? बुलडोजर के निकलते ही पीछे की सभी गाड़ियाँ ऊपर को जाने लगी।  जब सब गाड़ी निकल गई तब हमारी गाड़ी निकल पाई। ऐसा  इम्तिहान कई बार हुआ।  1. 25 कि.मी. का सफर ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा था। अन्तोगत्वा जब हमारी कार नैना देवी के पार्किंग में करीब दोपहर 12:50 बजे खड़ी  हुई तब साँस में साँस आई। मंदिर जाने का मार्ग साफ़-सुथरा था। सड़क के दोनों तरफ दुकाने सजी हुई थी। जल्द ही हमलोग मंदिर के प्रांगण में दाखिल हुए।  वहाँ से चारों तरफ कतार में खड़े श्रद्धालु ही दिख रहे थे। पूछने पर कतार के प्रारंभिक छोर का पता चला और हमलोग भी उस कतार का  हिस्सा बन गए। दस कदम बढ़ने पर कतार भीड़ में बदल गई। बाई तरफ खाई एवं दाई तरफ दीवार के बिच फंसे श्रद्धालु अपने आप को संतुलित करने में असमर्थ महसूस कर रहे थे। हालांकि पच्चीस कदम बढ़ने के बाद दोनों तरफ रेलिंग की वजह से भीड़ सुरक्षित कतार में बदल गई और सुविधाजनक ढंग से माँ नैना देवी का दर्शन कर करीब दोपहर को दो बजे हमलोग नीचे आ गए। दोपहर का खाना खा कर लगभग तीन बजे हमलोग आंनदपुर साहिब के  यात्रा को रवाना हो गए



यह मंजर 3 अगस्त 2008 की दुर्घटना को याद दिलाने में सक्षम है, परन्तु न तो प्रशासन को फ़िक्र है न श्रधालुओं को सब्र।






माता श्री नैना देवी जी का इतिहास और पुराण

श्री नैना देवी मंदिर 1177 मीटर की ऊंचाई पर जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश मे स्थित है | कई पौराणिक कहानियां मंदिर की स्थापना के साथ जुडी हुई हैं |

एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने खुद को यज्ञ में जिंदा जला दिया, जिससे भगवान शिव व्यथित हो गए |और उन्होंने सती के शव को कंधे पर उठा कर तांडव नृत्य शुरू कर दिया |जिससे  स्वर्ग में सभी देवता भयभीत हो गए कि भगवान शिव का यह रूप प्रलय ला सकता है तो सबों ने भगवान विष्णु से यह आग्रह किया कि वे अपने चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में काट दें | श्री नैना देवी मंदिर वह जगह है जहां सती की आंखें गिरी थीं।

विशेष अन्य जानकारी मंदिर न्यास की आधिकारिक वेब-साइट http://www.srinainadevi.com/ पर जा कर प्राप्त कर सकते हैं।


©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, August 15, 2018

MEME SERIES - 13


Biweekly Edition (पाक्षिक संस्करण) 15 Aug'2018 to 28 Aug'2018

मीम (MEME)

"यह एक सैद्धांतिक इकाई है जो सांस्कृतिक विचारों, प्रतीकों या मान्यताओं आदि को लेखन, भाषण, रिवाजों या अन्य किसी अनुकरण योग्य विधा के माध्यम से एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में पहँचाने का काम करती है। "मीम" शब्द प्राचीन यूनानी शब्द μίμημα; मीमेमा का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ हिन्दी में नकल करना या नकल उतारना होता है। इस शब्द को गढ़ने और पहली बार प्रयोग करने का श्रेय ब्रिटिश विकासवादी जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिंस को जाता है जिन्होने 1976 में अपनी पुस्तक "द सेल्फिश जीन" (यह स्वार्थी जीन) में इसका प्रयोग किया था। इस शब्द को जीन शब्द को आधार बना कर गढ़ा गया था और इस शब्द को एक अवधारणा के रूप में प्रयोग कर उन्होने विचारों और सांस्कृतिक घटनाओं के प्रसार को विकासवादी सिद्धांतों के जरिए समझाने की कोशिश की थी। पुस्तक में मीम के उदाहरण के रूप में गीत, वाक्यांश, फैशन और मेहराब निर्माण की प्रौद्योगिकी इत्यादि शामिल है।"- विकिपीडिया से साभार.

MEME SERIES - 13

By looking at this picture you might be having certain reaction in your mind, through this express your reaction as the title or the  caption. The selected title or caption of few people will be published in the next MEME SERIES POST.

इस तस्वीर को देख कर आपके मन में अवश्य ही किसी भी प्रकार के प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई होगी, तो उसी को शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)के रूप में व्यक्त करें। चुने हुए शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)को अगले MEME SERIES POST में प्रकाशित की जाएगी।

3 WISE MONKEYS AND WHO IS 4TH?


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The next edition will be published on  AUGUST 29, 2018. If you have similar type of picture on your blog, leave a link of your post in my comments section. I will link your posts on my blog in the next edition. Thank you very much dear friends for all your valuable captions for MEME SERIES-12 . Your participation and thoughts are deeply appreciated by me. Some of the best captions are listed below.

अगला संस्करण 29 अगस्त , 2018 को प्रकाशित किया जाएगा। यदि आपके ब्लॉग पर इस तरह की कोई तस्वीर है, तो अपने पोस्ट का लिंक मेरी टिप्पणी अनुभाग में लिख दें। मैं अगले संस्करण में अपने ब्लॉग पर आपका पोस्ट लिंक कर दूंगा। मेरे प्रिय मित्रों, आपके सभी बहुमूल्य शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION) के लिए धन्यवाद। MEME SERIES-12 के पोस्ट पर आपकी भागीदारी और विचारों ने मुझे बहुत प्रभावित किया, उनमें से कुछ बेहतरीन कैप्शन नीचे उल्लेखित हैं। 


MEME SERIES-12 के बेहतरीन कैप्शन

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खुद के बनाये यंत्रों के बीच यंत्र होता आदमी.....................................सुशील कुमार जोशी (SKJoshi)
सावधानी हटी, दुर्घटना घटी..........................................................Meena Sharma
Making India .... a manufacturing hub....................................Yogi Saraswat

Monday, August 13, 2018

मित्र मंडली -82




मित्रों , 
"मित्र मंडली" का  बयासी  वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 06.08.2018  से 12.08.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -82    
(नोट : मेरे कई ब्लॉग अनुसरणकर्ता  मित्र का पोस्ट जो मुझे बहुत अच्छा लगता है परन्तु मैं उसे मित्र मंडली में सम्मलित नहीं करता क्यूंकि उनकी रचना पहले से ही लोकप्रिय होती है और समयाभाव के कारण मैं उनके पोस्ट पर टिप्पणी  भी नहीं कर पाता हूँ, इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।), 

इस सप्ताह के सात रचनाकार 

जाने कैसे लोग

राधा तिवारी  जी  


अमर शहीद के नाम

रेणु  बाला जी  

"मातृभूमि पर मर-मिटने को प्रेरित करती एवं शहीदों के बलिदानों को नमन करती सुंदर रचना। "

श्वेता सिन्हा जी 

"प्रकृति के साथ छेड़-छाड़ के कारण आई प्राकृतिक आपदा बाढ़ के प्रभाव से आम आदमी के जीवन की वीभत्स मंजर को  हृदय विदारक शब्द चित्रण करती   मार्मिक रचना। "

कवि तुम ....

डॉ. प्रतिभा सोवती जी  

"कवि को विपरीत परिस्थिति में लिखते रहने को  प्रेरित करती सुंदर रचना। "

आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 20-08-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

मेरी प्रस्तुति  :


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Friday, August 10, 2018

भाखड़ा-नंगल डैम यात्रा


पुनरुत्थान भारत का नया मंदिर - भाखड़ा-नंगल डैम की यात्रा 
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“मुख्य पर्यटन स्थल  के भ्रमण हेतु जब कोई पर्यटक कार्यक्रम बनाता है तो उसकी कोशिश रहती है कि आस-पास के क्षेत्रों का भी अवलोकन कर लिया जाए, परन्तु कभी-कभी मुख्य क्षेत्र के अवलोकन के साथ अन्य क्षेत्र के अवलोकन  करने का मौसम नहीं भी रहता है फिर भी उसके मन में होता है कि जब यहाँ तक आ ही गए है तो वहाँ एक बार जा कर देखने में हर्ज क्या है ? और जब वहाँ जाता है तो कुछ खास नहीं देख पाने के अफ़सोस के साथ दुबारा उस स्थल पर आने का अपने आप को वचन देता है जो संभवतः उस स्थल पर आना कभी संभव नहीं हो पाता है”।

उपरोक्त कथन एक पर्यटक के भ्रमण कार्यक्रम में अपने लोभ को न संभाल पाने का एक उदाहरण है अब मैं आपसे  अपने दुसरे लोभ के बारे में चर्चा करना चाहूँगा। पर्यटन स्थल के भ्रमण का  कार्यक्रम बनाते समय, एक पर्यटक की कोशिश रहती है कि यात्रा मार्ग का नक्शा क्लोज्ड सर्किट में हो और इसी लालच का परिणाम है कि मैं आज आपके सामने इस यात्रा-वृतांत को आपके समक्ष प्रस्तुत कर पा रहा हूँ। 

मेरी श्रीमती जी की इच्छा हुई कि सुबह चलकर हिमाचल प्रदेश में स्थित माता नैना देवी जी  के दर्शन कर शाम तक घर लौट आयें।  मेरे निवास स्थान से माता नैना देवी जी के मंदिर की दूरी लगभग 150कि.मी. है अर्थात आना-जाना कुल 300कि.मी.और जाना भी अपने निजी वाहन से था तो मैं आस-पास के दर्शानिये स्थालों के अवलोकन का लोभ संभाल न सका और मैंने एक  हेक्टिक प्रोग्राम बना डाला जो निम्न प्रकार से था :
 मेरे निवास स्थान से भाखड़ा-नंगल डैम  127कि.मी.
 भाखड़ा-नंगल डैम से माता नैना देवी जी के मंदिर की दूरी 33कि.मी.
माता नैना देवी जी के मंदिर से आनंदपुर साहिब 24कि.मी.
आनंदपुर साहिब से मेरा  निवास स्थान 132कि.मी. अर्थात आना-जाना कुल 316कि.मी.
उपरोक्त प्रोग्राम में पूर्वनिर्धारित प्रोग्राम से दूरी का ज्यादा अंतर नहीं था परन्तु समय का अभाव अवश्य महसूस हो रहा  था । चिंता विशेष कर विरासत-ए-खालसा में प्रवेश का था, जिसका प्रवेश द्वार सायं चार बजे तक ही खुला रहता है।

खैर ! हमलोगों की यात्रा सुबह 5 बजे शुरू हुई और  गढ़शंकर से लगभग 7 कि.मी. बाद प्रकृति का नज़ारा बदल गया। चारों तरफ पहाड़ियाँ हमारे स्वागत में खड़ी थी एवं सडक के दोनों तरफ हरे-भरे पेड़ हमारी यात्रा को सुखद बनाने में सक्षम थे। जैसे ही यह नज़ारा हमारी आँखों से ओझल हुआ तभी कुछ देर बाद नंगल शहर की चमचमाती सड़क अपने पलक- पाँवड़े बिछाए हमलोगों का स्वागत कर रही थी। शहर के बीचो-बीच नंगल डैम अपने आन-बान और शान से खड़ी थी। हमलोग अपलक उस डैम को निहार रहे थे। हमें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या भाखड़ा-नंगल डैम यही है। क्योंकि हमें यह तो पता था कि भाखड़ा डैम को देखने हेतु परमिट की आवश्यकता होती है।  हमलोग डैम देखने के बाद एक ढाबा में नास्ता के लिए रुके तब हमें पता चला की यह नंगल डैम है और यहाँ से 1 कि.मी. की दूरी पर भाखड़ा-व्यास प्रबंधक के जन संपर्क कार्यालय से परमिट लेने के बाद 11 कि.मी. पर भाखड़ा डैम है। हमलोग झटपट नास्ता कर भाखड़ा डैम के लिए निकल पड़े। भाखड़ा बाँध के लिए परमिट सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 3:20 बजे तक मिलता है. इसके लिए आपके पास कोई भी सरकारी मान्य पहचान पत्र होना आवश्यक है। हमलोग परमिट ले कर आगे बढ़े।  परमिट एवं सामान्य सुरक्षा जाँच के बाद हम लोगों को आगे जाने की अनुमति सुरक्षाकर्मियों द्वारा दी गई। सुरम्य रास्तों से होते हुए जब हमने बहुत ही विशाल भाखड़ा बाँध को देखा तो उसके भव्यता को देखते ही रह गए। विशाल भाखड़ा बाँध के सामने सतलुज नदी, पानी की एक हरी पतली धार की तरह दिख रही थी। घुमावदार रास्तों के कारण भाखड़ा बाँध हमलोगों के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा था और कुछ दूर चलने पर काफी खुला स्थान मिला जहाँ एक तरफ बाँध के ऊपर जाने का रास्ता था परन्तु सुरक्षा कारणों से वह बंद था। उसी तरफ खाने-पीने  के लिए एक कैंटीन था और  दूसरी तरफ पं. जवाहलाल नेहरू की 50  फुट  ऊँची पीतल की मूर्ति भारत के नए युग के निर्माण के संकेत चिन्ह के रूप में खड़ी थी।  सुरक्षा कारणों के कारण पर्यटक यहाँ के अद्भुत दृश्य का आनंद नहीं ले पाते हैं। (नोट - अगर आप नास्ता या खाने के समय पर यहाँ पहुंचते हैं तो यहाँ के सुरम्य वातावरण में बैठ कर नास्ता या खाने का लुफ्त उठा सकते हैं। ) भाखड़ा बाँध से नैना देवी जाने के लिए परमिट की पुनः जाँच होती है। 23 कि.मी., भाखड़ा बाँध से नैना देवी की यात्रा गोबिंद सागर झील के सौंदर्य को निहारते हुए आराम से कट जाती है। 







नैना देवी मंदिर से गोबिंद सागर झील एवं रोप-वे का विहंगम दृश्य 
भाखड़ा-नंगल बहुउद्देश्यीय बाँध  के प्रमुख्य तथ्य :

1. भाखड़ा-नंगल बहुउद्देश्यीय बाँध  हिमाचल प्रदेश एवं पंजाब राज्य के सरहद पर स्थित है और सतलुज नदी पर भाखड़ा और नंगल में बने दो बाँधों के नाम पर रखा गया है।

2. नंगल बांध का निर्माण भाखड़ा बाँध के 13 कि.मी. नीचे की ओर नंगल (पंजाब ) में किया गया है। यह 29 मीटर ऊंचा, 305 मीटर लंबा और 121 मीटर चौड़ा एक सहायक बांध है, जो भाखड़ा बांध के दैनिक जल उतार-चढ़ाव को संतुलन बनाए रखने में एक जलाशय के रूप में कार्य करता है।

3. भाखड़ा बाँध संसार के ऊँचे कंक्रीट के सीधे ठोस बांधों में से एक है जिसकी ऊँचाई 225.55 मी. है जो दिल्ली के प्रसिद्ध क़ुतुब मीनार से तीन गुना है।

4. सतलुज नदी के पानी को गोबिंद सागर झील में जमा किया गया है जिसकी लम्बाई 96.56 कि.मी. है इसमें 9621मिलियन घन मी. पानी समा सकता है।

5. इस परियोजना के निर्माण में 15 वर्ष (1948-1963) लगे और 13000 मजदूर, 300 इंजीनियर, 30 विदेशी विशेषज्ञ दिन-रात काम करते रहे।

6. इसमे इतनी कंक्रीट लगी जिससे पुरे भूमध्य रेखा पर 8 फुट चौड़ी सड़क का निर्माण हो सकता था।

7. 1963 में इसकी लागत करीब 245 करोड़ रूपए थी।

8. भाखड़ा-नंगल बाँध की अनुमानित आयु 400 वर्षों से अधिक अंकित की गई है।

9. भाखड़ा नहर प्रणाली की लम्बाई लगभग 4830 कि.मी. है।

10. भाखड़ा नांगल परियोजना को 22 ऑक्टूबर 1963 में देश को समर्पित किया गया था।

विशेष अनुरोध : अगर आप माता नैना देवी मंदिर के दर्शन हेतु यात्रा करने का प्रोग्राम बना रहें हो तो साथ में इस आधुनिक भारत के मंदिर के दर्शन का आनंद अवश्य लें।
©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"