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Friday, October 20, 2017

विश्व गुरु भारत









विश्व गुरु भारत 
मिले विश्व-गुरु का ताज़ भारत को,
करते हैं हम सब अर्चन,
पर, हम जानते हैं  कि हम ही हैं ,
इसकी राहों में अड़चन।

दोगली नीति हम सब को चाहिए,
हमें ना कोई कष्ट हो,
दूसरे की हो कोई भी गलती,
सज़ा न थोड़ी भी कम हो।

अपना बेटा करे दुष्कर्म कभी,
केस रफा-दफा हो जाए,
गर अपनी बेटी हुई पीड़ित तो,
दोषी को मौत मिल जाए।

करोड़ों लगा कर ही कोई यहाँ,
जब बन जाता है नेता,
समाज की भलाई वही करेगा,
कब समझेगी ये जनता?

पढ़ा-लिखा मंत्री सभी को चाहिए,
नीति निर्धारण करने को,
तो हम ही कैसे तैयार हो गए,
अनपढ़ नेता चुनने को।

शिक्षा-स्वास्थ्य जब बने बाजारू,
देश कभी न बच पाएगा,
विश्व-गुरु का ताज़ मिले भारत को,
ये संभव न हो पाएगा।

सिर्फ अधिकारों के लिए ही लड़ना,
होगी ये बेईमानी,
अगर सपना पूरा करना है तो,
सभी कर्तव्यों का पालन करना,
ऐ मेरे हिन्दुस्तानी।
-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




Wednesday, October 18, 2017

भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य एवं अधिकार को जाने

भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य एवं अधिकार


मौलिक कर्तव्य 



मौलिक अधिकार


1. समता या समानता का अधिकार:
अनुच्छेद 14:
 विधि के समक्ष समता- इसका अर्थ यह है कि राज्य सही व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा तथा उन पर एक समान ढंग से उन्‍हें लागू करेगा. 
अनुच्छेद 15:
 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेद-भाव का निषेद- राज्य के द्वारा धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग एवं जन्म-स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा. 
अनुच्छेद 16:
 लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता- राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता होगी. अपवाद- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग. 
अनुच्छेद 17:
 अस्पृश्यता का अंत- अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए इससे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है.
अनुच्छेद 18:
 उपाधियों का अंत- सेना या विधा संबंधी सम्मान के सिवाए अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाएगी. भारत का कोई नागरिक किसी अन्य देश से बिना  राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है.

2. स्वतंत्रता का अधिकार:
अनुच्छेद 19-
 मूल संविधान में 7 तरह की स्वतंत्रता का उल्लेख था, अब सिर्फ 6 हैं: 
19 (a) बोलने की स्वतंत्रता.
 
19 (b) शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्रित होने और सभा करने की स्वतंत्रता.
 
19 (c) संघ बनाने की स्वतंत्रता.
 
19 (d) देश के किसी भी क्षेत्र में आवागमन की स्वतंत्रता.
 
19 (e) देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता. (अपवाद जम्मू-कश्मीर)
 
19 (f) संपत्ति का अधिकार.
 
19 (g) कोई भी व्यापार एवं जीविका चलाने की स्वतंत्रता.
 
नोट:
 प्रेस की स्वतंत्रता का वर्णन अनुच्छेद 19 (a) में ही है.
अनुच्छेद 20-
 अपराधों के लिए दोष-सिद्धि के संबंध में संरक्षण- इसके तहत तीन प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन है: 
(a)
 किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी. 
(b)
 अपराध करने के समय जो कानून है इसी के तहत सजा मिलेगी न कि पहले और और बाद में बनने वाले कानून के तहत.
(c)
 किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिय बाध्य नहीं किया जाएगा.
अनुच्छेद 21-
 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का सरंक्षण: किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है.
अनुच्छेद 21(क)
 राज्य 6 से 14 वर्ष के आयु के समस्त बच्चों को ऐसे ढंग से जैसा कि राज्य, विधि द्वारा अवधारित करें, निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा. ( 86वां संशोधन 2002 के द्वारा).
अनुच्छेद 22-
 कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी और निरोध में संरक्षण: अगर किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया गया हो, तो उसे तीन प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है: 
(1)
 हिरासत में लेने का कारण बताना होगा. 
(2)
 24 घंटे के अंदर (आने जाने के समय को छोड़कर) उसे दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया जाएगा. 
(3)
 उसे अपने पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार होगा.

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार 
अनुच्छेद 23:
 मानव के दुर्व्यापार और बलात श्रम का प्रतिषेध: इसके द्वारा किसी व्यक्ति की खरीद-बिक्री, बेगारी तथा इसी प्रकार का अन्य जबरदस्ती लिया हुआ श्रम निषिद्ध ठहराया गया है, जिसका उल्लंघन विधि के अनुसार दंडनीय अपराध है.
नोट: जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सेवा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है.
अनुच्छेद 24: बालकों के नियोजन का प्रतिषेध: 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, खानों या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है.

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार-
अनुच्छेद 25:
 अंत:करण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता: कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है और उसका प्रचार-प्रसार कर सकता है.
अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता: व्यक्ति को अपने धर्म के लिए संथाओं की स्थापना व पोषण करने, विधि-सम्मत सम्पत्ति के अर्जन, स्वामित्व व प्रशासन का अधिकार है.
अनुच्छेद 27: राज्य किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है, जिसकी आय किसी विशेष धर्म अथवा धार्मिक संप्रदाय की उन्नति या पोषण में व्यय करने के लिए विशेष रूप से निश्चित कर दी गई है.
अनुच्छेद 28: राज्य विधि से पूर्णतः पोषित किसी शिक्षा संस्था में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी. ऐसे शिक्षण संस्थान अपने विद्यार्थियों को किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने या किसी धर्मोपदेश को बलात सुनने हेतु बाध्य नहीं कर सकते.

5. संस्कृति एवं शिक्षा संबंधित अधिकार: 
अनुच्छेद 29:
 अल्पसंख्यक हितों का संरक्षण कोई अल्पसंख्यक वर्ग अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है और केवल भाषा, जाति, धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा.
अनुच्छेद 30: शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार: कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपनी पसंद की शैक्षणिक संस्था चला सकता है और सरकार उसे अनुदान देने में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेगी.

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार: 
'संवैधानिक उपचारों का अधिकार' को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है.
 
अनुच्छेद 32:
 इसके तहत मौलिक अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए समुचित कार्यवाहियों द्वारा उच्चतम न्यायालय में आवेदन करने का अधिकार प्रदान किया गया है. इस सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायालय को पांच तरह के रिट निकालने की शक्ति प्रदान की गई है जो निम्न हैं: 
(a)
 बंदी प्रत्यक्षीकरण 
(b)
 परमादेश 
(c)
 प्रतिषेध लेख 
(d)
 उत्प्रेषण 
(e)
 अधिकार पृच्छा लेख 

(1) बंदी प्रत्यक्षीकरण:
 यह उस व्यति की प्रार्थना पर जारी किया जाता है जो यह समझता है कि उसे अवैध रूप से बंदी बनाया गया है. इसके द्वारा न्यायालय बंदीकरण करने वाले अधिकारी को आदेश देता है कि वह बंदी बनाए गए व्यक्ति को निश्चित स्थान और निश्चित समय के अंदर उपस्थित करे जिससे न्यायालय बंदी बनाए जाने के कारणों पर विचार कर सके. 
(2) परमादेश:
 परमादेश का लेख उस समय जारी किया जाता है, जब कोई पदाधिकारी अपने सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वाह नहीं करता है. इस प्रकार के आज्ञापत्र के आधार पर पदाधिकारी को उसके कर्तव्य का पालन करने का आदेश जारी किया जाता है. 
(3) प्रतिषेध लेख:
 यह आज्ञापत्र सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा निम्न न्यायालयों तथा अर्द्ध न्यायिक न्यायाधिकरणों को जारी करते हुए आदेश दिया जाता है कि इस मामले में अपने यहां कार्यवाही न करें क्यूंकि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है. 
(4) उत्प्रेषण:
 इसके दवरा अधीनस्थ न्यायालयों को यह निर्देश दिया जाता है कि वे अपने पास लंबित मुकदमों के न्याय निर्णयन के लिए उससे वरिष्ठ न्यायालय को भेजें. 
(5) अधिकार पृच्छा लेख:
 जब कोई व्यक्ति ऐसे पदाधिकारी के रूप में कार्य करने लगता है जिसके रूप में कार्य करने का उससे वैधानिक रूप से अधिकार नहीं है न्यायालय अधिकार-पृच्छा के आदेश के द्वारा उस व्यक्ति से पूछता है कि वह किस अधिकार से कार्य कर रहा है और जब तक वह इस बात का संतोषजनक उत्तर नहीं देता वह कार्य नहीं कर सकता है.



Monday, October 16, 2017

मित्र मंडली -39



मित्रों ,
"मित्र मंडली" का उनचालीसवां अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 09.10.2017  से 15.10.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-

HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML
मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -39     

इस सप्ताह के सात रचनाकार 

एक और एक, एक !

विश्व मोहन जी

"आध्यात्मिक प्रेम और सांसारिक गतिविधियों में एक और एक योग के अंतर को समझाती सुन्दर लालित्यपूर्ण कविता। 

नेपथ्य

पुरषोत्तम कुमार सिन्हा जी 


काई

अमित अग्रवाल  जी

ख़ाकी

रवींद्र सिंह यादव जी 


ख्वाब की तरह से 

लोकेश नशीने जी 

मेरे स्नेही सागर !

मीना शर्मा जी 

"नदी एवं स्त्री की व्यथित भाव को व्यक्त करती सुन्दर कविता । सुन्दर प्रस्तुति। " 
"अपनी निश्छल भावनाओं को हाइकु के माध्यम से प्रस्तुत किया है। सुन्दर प्रस्तुति। "

आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 23-10-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

मेरी दो प्रस्तुति  : 

1.  हम-तुम


Friday, October 13, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 29 (Photography : Bird 29 )

Photography: (dated 10 08 2017 06 :45 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Scaly-breasted munia

The scaly-breasted munia or spotted Munia is a sparrow-shaped bird found in tropical Asia, India, Sri Lanka from east to Indonesia and  Filipinos. Upper part adult bird  is brown and has a black conical beak. This munia eats mainly grass seeds apart from berries and small insects. Breeding pairs make dome-shaped nests using either grass or bamboo leaves.


Scientific name:  Lonchura punctulata
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

छिलकेदार छाती  या स्पॉटिड मुनिया, एक गौरैया आकार का पक्षी है जो उष्णकटिबंधीय एशिया: भारत, पूर्वी श्रीलंका से इंडोनेशिया तक और  फिलीपींस में पाए जाते हैं। वयस्क पंक्षी का ऊपरी भाग भूरा और एक काला शंक्वाकार चोंच होता है। यह मुनिया बेर और छोटे कीड़े के अलावा मुख्य रूप से घास के बीज खाती है। प्रजनन जोड़े घास या बांस के पत्तों का उपयोग कर गुंबद के आकार का घोंसले बनाते हैं।


वैज्ञानिक नाम: लोनचुर पंककुलाटा
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Assamese: ফুটুকী টুনি; Bengali: তিলা মুনিয়া; French: Capucin damier; Gujarati:શીંગબાજ, ટપકાંવાળી મુનિયા, ટાલીયું તપશિયુ; Hindi: मुनिया, सीनाबाज, तेलिया मुनिया, बिन्दुकित मुनिया; Malayalam: ചുട്ടീയാറ്റ; Marathi: ठिपकेदार मुनिया, खवलेवाला मुनिया, मनोली; Nepali: कोटेरो मुनियाँ; Punjabi: ਤੇਲੀ ਮੁਨੀਆ; Tamil: புள்ளிச் சில்லை






©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"





Wednesday, October 11, 2017

हम-तुम















      हम-तुम

चलो फिर से वही अपने, 
सुहाने दिनों को लें आयें। 

चलो फिर से वही अपने, 
ख़ुशी के पलों को लें आयें। 

न यूँ तन्हां हम-तुम रहें,
ख़ुशी का सामान लें आयें। 

कुछ ख़्वाब हम-तुम देखें,
ऐसे पल फिर से लें आयें। 

चलो कर लें नादानियाँ,
हम अपनी मुस्कान लें आयें। 

ख़ुश रहें हम-तुम हमेशा,
उसी ज़ज्बात को लें आयें। 

बेरंग, जीवन हमारा है  
नहीं है इन्द्रधनुष इस में  
हम-तुम खो जायें बाहों में,
फिर वो सात रंग लें आयें। 

इस गीत को निचे दिए गए लिंक को क्लिक कर सुन सकते हैं।



-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Monday, October 9, 2017

मित्र मंडली -38



मित्रों ,
"मित्र मंडली" का अड़तीसवें अंक का पोस्ट प्रस्तुत है। इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है।  इसमें  दिनांक 02.10.2017  से 08.10.2017  तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।

पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है  :-

HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML
मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों  तक पहुँचाना है। 

आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी  के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा।  

प्रार्थी 

राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -38    

इस सप्ताह के पाँच महिला रचनाकार 

प्रार्थना

मीना शर्मा जी 

"ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
"एक अनोखे रिश्ते की मार्मिक कहानी, हम माने या ना माने हमारे आस-पास के सभी सजीव एवं निर्जीव चीजों से एक लगाव सा हो जाता है परन्तु इसका पता हमें उस सजीव एवं निर्जीव को खोने या उसे कष्ट में होने पर होता है। "

आराम चाहिए......

सुधा देवरानी जी 

"विरोधाभास लिए आज की जीवन शैली को सुन्दर ढ़ंग से व्याख्या करती कविता , आजकल शिक्षित होना ही आराम की ज़िन्दगी जीने का सबब बनता जा रहा है जो आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी है।  "



ओ! शरद पूर्णिमा के शशि नवल !! ----------- कविता --

रेणु  बाला जी  


आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा ।  आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 16-10-2017  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....

मेरी दो प्रस्तुति  : 

1.  फोटोग्राफी : पक्षी 27 (Photography : Bird 27 )

Friday, October 6, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 28 (Photography : Bird 28 )

Photography: (dated 27 07 2017 07 :1 5 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Indian robin

The Indian robin is a species of bird in the family Muscicapidae. It is widespread in the Indian subcontinent, and ranges across Bangladesh, Bhutan, India, Nepal, Pakistan, and Sri Lanka. The males of northern populations have a brown back whose extent gradually reduces southwards with populations in the southern peninsula having an all black back. They are commonly found in open scrub areas and often seen running along the ground or perching on low thorny shrubs and rocks. The long tail is usually held up and the chestnut undertail coverts and dark body make them easily distinguishable from pied bushchats and oriental magpie robins.

Scientific name:  Copsychus fulicatus
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

काली चिड़ी(इंडियन रोबिन), मस्किकापिडे परिवार की एक प्रजाति है। यह भारत, बांग्लादेश, भूटान,  नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में पाए जाते है। उत्तरी आबादी के पुरुषों पक्षी भूरे रंग के होते हैं, और  दक्षिणी प्रायद्वीप में काले रंग के होते है। वे आम तौर पर खुले एवं झाड़ियों वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं और अक्सर जमीन पर चलते या कम कांटेदार झुंडों और चट्टानों पर बैठे आप इसे देखा सकते है। खड़ी लंबी पूंछ आमतौर पर आयोजित की जाती है और पूंछ के पीछे का रंग शाहबलूत जैसा और शरीर का  गहरा रंग, इन्हें काला पिद्दा (पाइड बुशचैट) और ओरिएंटल मैग्पी रोबिन में से आसानी से पहचाना जा सकता है।

वैज्ञानिक नाम: कॉप्सिकस फॉलिकेटस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Gujarati: દેવ ચકલી; Hindi: काली चिड़ी; Kannada: ಚಿಟ್ಟು ಮಡಿವಾಳ; Malayalam: കല്‍മണ്ണാത്തി; Marathi: चीरक, काळोखी; Nepali: देवी श्यामा; Punjabi: ਪਿੱਦਾ; Sanskrit: पोदकी, कृष्णपक्षी, देवी श्यामा; Tamil:கருஞ்சிட்டு




©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"







Wednesday, October 4, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 27 (Photography : Bird 27 )

Photography: (dated 27 07 2017 07 :1 5 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Greater coucal or Crow pheasant

The greater coucal or crow pheasant , is a large non-parasitic member of the cuckoo order of birds, the Cuculiformes. A widespread resident in Asia, from India, Pakistan, east to south China, Nepal and Indonesia, it is divided into several subspecies, some being treated as full species. They are large, crow-like with a long tail and coppery brown wings and found in wide range of habitats from jungle to cultivation and urban gardens. They are weak fliers, and are often seen clambering about in vegetation or walking on the ground as they forage for insects, eggs and nestlings of other birds. They have a familiar deep resonant call which is associated with omens in many parts of its range.
Scientific name:  Centropus sinensis
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

महोख, महोक कूक या कौवा तीतर , कोयल परिवार( कुकुलिफोर्मेस) के एक बड़े गैर-परजीवी सदस्य हैं। यह भारत, पाकिस्तान, पूर्व से दक्षिण चीन, नेपाल और इंडोनेशिया में पाया जाता है। इसकी कौओं की तरह एक लंबी पूंछ और तांबा के भूरे रंग के पंख है। ये जंगल से खेती और शहरी बागानों के विभिन्न प्रकार के स्थानों पर  पाए जाते हैं। ये कमजोर उड़ान भरने वाले होते हैं, और प्रायः वनस्पतियों, जमीन पर कीड़े और पंक्षियों के अंडे खाने के लिए घूमते रहते हैं ।

वैज्ञानिक नाम: सेन्ट्रोपस सीनेन्सिस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Bengali: বড় কুবো; Gujarati: કૂકડિયો કુંભાર; Hindi: महोख, महोक कूक; Kannada: ಕೆಂಬೂತ; Malayalam: ചെമ്പോത്ത്; Marathi: भारद्वाज, सोनकावळा, कुक्कुटकुंभा, कुंभारकावळा, सुलक्षणी, नपिता, चमारकुकडी, कुंभार्‍या; Nepali: ढोडे गोकुल; Punjabi: ਕਮਾਦੀ ਕੁੱਕੜ; Sanskrit: कुक्कुभ; Tamil: செம்போத்து, செம்பகம்; Telugu: జెముడుకాకి








©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"