कस्तूरबा गाँधी -जन्म 11 April 1869
(रचनात्मक परिवर्तनों की नेता और पोषणकर्ता)
(रचनात्मक परिवर्तनों की नेता और पोषणकर्ता)
कस्तूरबा थी नारी एक महान,
उन्होंने बनाई अपनी पहचान,
साज-श्रृंगार को छोड़ा था उसने,
अपने जीवन के उद्देश्य को जान।
पहले थी वह एक नारी निरक्षर,
लगन और मेहनत से बनी साक्षर
आजादी की पहली अलख जगी तब,
नारी आवाज की बनी हस्ताक्षर।
गाँधी जी ने जो देखे थे सपने,
बा ने उसको बना लिए थे अपने,
गाँधी जी को पग-पग साथ दिया था,
लगीं स्वतंत्रता की माला जपने।
खुद को बदलना, ना होता आसान,
बा बदली, परिस्थितियों को पहचान,
जीवन बदली, रंग-ढ़ंग भी बदला,
तब मोहनदास गाँधी बने महान।
© राकेश कुमार श्रीवास्तव 'राही'













