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Friday, November 16, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 9)


(भाग – 9)
 श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -2

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आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व”आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्राआओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा" एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –8) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1") में पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. “हर की पौड़ी”, ऋषिकेश, यमनोत्री, बड़कोट, उत्तरकाशी, गंगोत्री यात्रा एवं सिद्ध गुरु बाबा चौरंगीनाथ के मंदिर दर्शन की यादों को दिल में सहेज कर अपने अगले पड़ाव हेलिकॉप्टर द्वारा ज्योर्तिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम दर्शन के लिए देवप्रयाग से 13 किमी पहले फाटा के एक होटल में रात्रि विश्राम के लिए रुके.
अब आगे .... 
फाटा कस्बा शांत एवं प्रकृति के गोद में बसा है. यहाँ, आप कहीं भी खड़े हो कर हिमशिखर का दर्शन कर सकते हैं. चिड़ियों की चहचहाहट के साथ जब सूर्य की पहली किरण ने मेरे कमरे की खिड़की पर दस्तक दी तो तन-मन में स्फूर्ति का संचार हुआ. कंबल से निकल कर एवं शाल ओढ़ मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने हिमालय की चोटी नज़र आ रही थी, गौरैया और मैना की झुंड भोजन की तलाश कर चहचहा रही थी. क़स्बा अभी पुरी तरह जगा नहीं था अभी अंगराई ही ले रहा था. प्रकृति की इस अनुपम दृश्य को देख कर मेरा भी मन भी इन नजारों में गुम होना चाहता था इसलिए मैं अपनी पत्नी के साथ नीचे उतर कर सड़क पर टहलने लगे. कल हमलोगों का शादी की सालगिरह थी और कल सुबह बाबा केदारनाथ जी की रुद्राभिषेक करना है ऐसा सोच कर हमलोगों को अद्भुत शांति महसूस हो रहा था. ऐसा लग रहा था मानो श्री केदार जी की अनुपम कृपा वृष्टि हो रही हो. 

खैर! कुछ देर टहलने के बाद हमलोग अपने होटल पहुँचे तो अन्य सभी सदस्य उठ चुके थे. पूर्वनियोजित कार्यक्रम के अनुसार हमलोगों को पहले हैलीकॉप्टर टिकट का इंतज़ाम करना था. इसलिए मैं और मेरा भाई सुनील, दोनों हैलीकॉप्टर के टिकट पता करने के लिए  निकलने वाले ही थे कि मैंने महसूस किया कि अन्य सभी सदस्यों की आशा भरी नज़रें मेरी तरफ देख रहीं हैं. 

तब सुनील ने ठिठकते हुए कहा “भाई साहब! हम सभी सोच रहे थे कि अगर हमलोग आने-जाने के लिए हेलिकॉप्टर कर लें तो बीस तारीख की शाम को हमलोग बद्रीनाथ धाम का भी दर्शन कर सकते हैं.”


मुझे भी इस प्रस्ताव से कोई ऐतराज़ नहीं था तो सबसे पहले हमलोग पिनाकल एयर प्राइवेट लिमिटेड के बुकिंग ऑफिस करीब सुबह सात बजे पहुँचे. वहाँ पहुँचने पर पता चला कि फाटा से श्री केदारनाथ धाम हैलीपैड की दूरी तय करने में करीब दस मिनट लगता है और आने-जाने का किराया 6700 रु. प्रति व्यक्ति है. हम सभी आठ सदस्यों के लिए टिकट उपलब्ध था अतः 53600 रु. का  आठ टिकट ले लिए और पिनाकल के कर्मचारी ने हमलोगों को सुबह 10 बजे रिपोर्ट करने को बोला. हमलोगों ने होटल के पास के दुकानों से सलाद के लिए सब्जी, ब्रेड और बटर ख़रीदा और उसी का नास्ता कर कार से पिनाकल हैलीपैड सुबह दस बजे पहुँचे और वहीँ गाड़ी पार्क कर ऑफिस में रिपोर्ट करने पहुँचे तो वहाँ के लॉबी में पैर रखने तक की जगह नहीं थी. वहाँ साठ-सत्तर यात्री पहले से बैठे थे. मैंने किसी तरह पिनाकल के ऑफिस कर्मचारी से बात की. वह अपनी औपचारिकता पुरी कर एक घंटा इंतजार करने को कहा. हमलोगों को अजीब लगा कि जब 11 बजे जाना था तो 10 बजे रिपोर्टिंग करने के लिए क्यूँ कहा. वहाँ के गतिविधियों को अवलोकन एवं जानकारी लेने पर पता चला कि किसी भी यात्री के उड़ान भरने का कोई निश्चित समय नहीं है, हेलिकॉप्टर की क्षमता एक साथ केवल पाँच या छः यात्रिओं को ले जाने की है और उन सभी यात्रियों का वजन की भी एक सीमा निर्धारित थी जिसके कारण कभी-कभी एक परिवार के लोग हेलिकॉप्टर से एक साथ उड़ान नहीं भर पा रहे थे. हेलिकॉप्टर की संख्या एक ही थी अतः हेलिकॉप्टर को दूसरी उड़ान भरने में आधा घंटा लग रहा था. बीते दिनों मौसम ख़राब होने से हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया था इस लिए यात्रियों की भीड़ ज्यादा थी. पिनाकल के ऑफिस कर्मचारी ने हमोलोगों में से चार व्यक्तियों को बुला लिया जिसमें मैं, मेरी पत्नी, मेरा बेटा, मेरी भाई की छोटी बेटी और साथ में दो अन्य यात्री थे. मेरी भाई की पत्नी को डर लग रहा था अतः वह मेरी पत्नी के साथ जाना चाह रही थी. पिनाकल के ऑफिस कर्मचारी से रिक्वेस्ट करने पर बेटी को छोड़ उसकी पत्नी को साथ लिया गया. हम सभी के लिए यह प्रथम हेलिकॉप्टर यात्रा थी इसलिए थोड़ा डर और रोमांच दोनों का अनुभव हो रहा था. जरूरी एहतियात के निर्देश पहले दे दिए गए और हमलोगों को हैलीपैड के एक किनारे खड़ा कर दिया गया. हेलिकॉप्टर जब लैंड करने लगा तो जोरों से हवा चलने लगी, अपने आप को संभालना मुश्किल हो रहा था. इतने में कुछ फिल्ड स्टाफ दौड़ कर हेलिकॉप्टर से यात्री निकाल कर बाहर लाए और एक सबका सामान ले आया. एक स्टाफ मेरे बेटे को पकड़ा था जिसे पाइलट के साथ बैठना था हम तीनों को दूसरा स्टाफ पकड़ा था और सामने के दरवाजे से प्रवेश करना था. तीसरा स्टाफ अन्य दो यात्रिओं को पकड़ रखा था जिन्हें हेलिकॉप्टर के आगे से होकर दूसरे दरवाजे से प्रवेश करना था. निर्धारित निर्देशानुसार फिल्ड स्टाफ दरवाजा खोला एवं हमलोगों को बैठा कर सीट-बेल्ट बाँध कर दरवाजा बंद कर दिया और चंद सेकेंडों में हमलोग घाटियों के ऊपर उड़ान भरने लगे.

ऐसे तो मुझे ऊँचे स्थान से नीचे देखने में डर लगता है परन्तु हेलिकॉप्टर से हज़ारों फीट नीचे का नज़ारा देखने में मुझे डर नहीं वरन् रोमांच महसूस हो रहा था. नीचे तीनों तरफ पहाड़ों की चोटियाँ और बीच में हज़ारों फीट गहरी घाटी नज़र आ रही थी. मंदाकिनी नदी एक पतली धारा के रूप जगह-जगह पर दिख रही थी. उड़ते हुए ऐसे विहंगम दृश्य को देखना अपने-आप में साहसिक कारनामे जैसा लगने के कारण सीना गर्व से चौड़ा हो रहा था. इन्हीं नजारों में खोए थे कि सामने श्री केदारनाथ जी का हैलीपैड दिखा और करीब दोपहर 12:25 बजे हमलोगों को पिनाकल के फिल्ड स्टाफ ने नीचे उतार कर हैलीपैड से बाहर किया. ऐसे तो मैंने बोईंग विमान यात्रा की है परन्तु जो रोमांच हेलिकॉप्टर के उड़ान में मिली वह हवाई जहाज में नहीं मिली. हमलोग हैलीपैड के बाहर अपने अन्य परिवार वालों के आने का इंतज़ार कर रहे थे. एक-एक करके कई हेलिकॉप्टर आई और चली गई. असल में श्री केदारनाथ जी के हैलीपैड पर सभी कंपनियों की हेलिकॉप्टर अपने-अपने हैलीपैड से उड़ान भर कर पहुँचती हैं. वहाँ पर एक साथ दो हेलिकॉप्टर एक साथ उतर सकती थी. करीब चालीस मिनट के बाद परिवार के अन्य चार सदस्य पहुँच गए, जिनकी तस्वीरें हमलोगों ने ली. 





हमलोग वहाँ चाय पी और सामान लेकर सबसे पहले भोजन किया फिर आगे बढ़े. श्री केदारनाथ जी की मंदिर के दर्शन को सभी लालायित थे. जैसे हमलोग आगे बढ़े बूंदा-बांदी शुरू हो गई परन्तु किसी के उत्साह में कोई कमी नहीं आ रही थी. सबसे पहले मंदाकिनी नदी मिली, उनके ऊपर बने पूल को पार किया  तो श्री केदारनाथ जी के मंदिर का शीर्ष दिखा। मंदिर के शीर्ष को देखकर स्वतः पैर तेज़ चलने लगे. हैलीपैड से मंदिर तक का रास्ता इतना सुगम था कि लग ही नहीं रहा था हमलोग किसी दुर्गम स्थल के पास हैं. कुछ सीढियाँ चढ़ने के बाद श्री केदारनाथ जी की मनमोहक मंदिर हम लोगों के समुख थी. भाव-विभोर होकर हमलोगों ने हाथ जोड़ कर मंदिर के आगे नतमस्तक हुए. मंदिर की परिक्रमा कर हमलोग ठहरने के लिए जगह की तलाश शुरू की. जब हमलोग हैलीपैड उतरे थे तो वहीँ पास में GMVN के अस्थाई कमरे बने हुए थे और कमरे में टू-टायर बेड लगे हुए थे. वो मुझे ख़ास अच्छा नहीं लगा था और जब हम मंदिर की तरफ जा रहे थे तो मुझे पंजाब एंड सिंध नामक धर्मशाला दिखा. मैं वहीँ चला गया. केयर टेकर ने मेरा परिचय पूछ कर कहने लगा कि कपूरथला का धर्मशाला है आप वहाँ चलें जाएं. मुझे उसका कमरा अच्छा लगा था और हलकी बारिश भी हो रही थी तो मैंने धर्मशाला के केयर-टेकर को समझा कर अपना वहीँ रुकने का इरादा बता दिया. उसने अपना रजिस्टर निकाला और औपचारिकता पुरी करने को कहा. अभी हमलोग औपचारिकता पूरी कर सामान कमरे में रखने ही वाले थे कि कपूरथला धर्मशाला के पंडित जी अपनी छतरी ले कर पहुँच कर बड़े प्यार से कहा "महाराज जी, आप मेरे यहाँ चले अगर आप को वह जगह पसंद ना आए तो आप यहाँ आकर ठहर लेना." हमदोनों भाई पंडित जी के साथ गए. वाकई में धर्मशाला होटल जैसा था तो हमलोग सपरिवार यहाँ आकर टिक गए. श्री केदारनाथ जी मंदिर के दोनों तरफ एक क़स्बा बस गया है. आप यहाँ आकर यह महसूस नहीं कर पायेंगे कि आप किसी दुर्गम स्थल पर है. श्री केदारनाथ जी मंदिर के आस-पास अत्याधुनिक साज-सज्जा से युक्त धर्मशालाएं, चौबीस घंटों बिजली की सप्लाई, सभी तरह के शाकाहारी भोजन और टाइल्स लगी सड़के और सडकों के किनारे लगे सुंदर लैप पोस्ट सभी यात्रियों के मन मोहने में सक्षम है. 
इस यात्रा के दौरान नजारों का लुत्फ़ आप नीचे दिए गए चित्रों से लें :














शेष  23-11-2018 के  अंक में .................................

भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :


आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश)

भाग -4 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा

भाग -5 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा

भाग -6 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन

भाग -7 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा)

भाग -8 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –8) श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1" 

©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, November 14, 2018

FACE OF COMMON MAN - 9



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-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"







Friday, November 9, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 8)


(भाग – 8)
 श्री केदारनाथ धाम की यात्रा -1
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आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व”आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्राआओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा) में पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. “हर की पौड़ी”, ऋषिकेश, यमनोत्री, बड़कोट, उत्तरकाशी एवं गंगोत्री यात्रा की खट्टे-मिठ्ठे यादों को दिल में सहेज कर अपने अगले पड़ाव श्री केदारनाथ धाम की यात्रा करने हेतु रात्रि विश्राम के लिए अपने-अपने बिस्तर पर सो गए.  
अब आगे ....

गंगोत्री से लौटने पर होटल में चोर को रंगे हाथ पकड़ने के बाद सभी की नींद उड़ गई थी. हम सभी उसी घटना पर देर रात तक चर्चा करते रहे और ईश्वर को लाख-लाख धन्यवाद दे रहे थे कि चोर ने जिस पर्स को उठाया था उसके पास ही एक छोटा पर्स था जिसमें यात्रा के दौरान खर्च के लिए रूपए थे, वो बच गए. सुबह गौरीकुंड (केदारनाथ) यात्रा प्रारंभ करने में विलंब हो गया और हमलोग ने गौरीकुंड के लिए प्रातः 7:30 अपनी यात्रा शुरू की. उत्तराखंड की सड़कों पर निजी वाहनों से यात्रा करने का अपना एक अलग आनंद है. बिना गड्ढों की सड़कें, सड़कों पर बहुत कम सवारी गाड़ी, कहीं-कहीं पर सर्पीले रास्ते, रास्तों के एक तरफ खाई, खाई के बीच में बलखाती नदी, सड़क की दूसरी तरफ ऊँचे-ऊँचे पहाड़, पहाड़ पर लम्बे-लम्बे पेड़, कभी-कभी सड़क के ठीक सामने पहाडो की चोटी, पहाड़ को आलिंगन करता बादलों के छोटे-छोटे समूह और बादलों का अनेकों बड़े-बड़े समूह पहाड़ों के सिरमौड़ को देखना एक अलौकिक अनुभव होता है. कुछ इसी प्रकार की यात्रा का आनंद हमलोग एक घंटा से ले रहे थे. तभी हमलोगों को चौरंगी खाल का बोर्ड दिखा. यह स्थल चौरंगीनाथ बाबा का मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो नाथ संप्रदाय की परंपरा के सिद्ध योगी हैं और गुरु गोरखनाथ जी की शिष्य परंपरा से जुड़े हैं। मेरे इस छोटे चार धाम यात्रा में यह स्थल सम्मलित नहीं था परन्तु जब हमलोग उत्तरकाशी से केदारनाथ जी की यात्रा के लिए निकले तो वहाँ के एक स्थानीय व्यक्ति ने इस स्थल की जानकारी दी और साथ में नचिकेता ताल के बारे में भी बताया. घने  देवदार और ओक (बलूत) के जंगलों के बीच स्थित चौरंगी खाल एक रमणीय स्थल है और वहाँ जाकर सुबह-सुबह चौरंगी नाथ जी का दर्शन कर गरमा-गर्म आलू के पराठे, बच्चों के लिए मैगी का नास्ता और उसके साथ मीठे रसीले आम का स्वाद आंखों के साथ-साथ उदर को तृप्त करने में सक्षम थे. हमलोगों ने इसका भरपूर लाभ उठाया . यहाँ से नचिकेता ताल जाने के लिए लगभग 3 कि.मी. पैदल मार्ग था और इतना भोजन कर लेने के बाद पैदल चलने की इच्छा किसी की नहीं हो रही थी. अब तक की यात्रा में दूरी के लिहाज से दूसरा सबसे लम्बा रास्ता हमें तय करनी थी, अतः हमलोग वहाँ से गौरीकुण्ड के लिए रवाना हो गए.





हमलोग रास्ते में केवल दिन का खाना खाने के लिए रुके. उसके बाद जो सड़क हमलोगों को मिला वह अभी तक के रास्तों में सबसे ख़राब एवं खतरनाक रास्ता था और लगभग पाँच कि.मी. के बाद गुप्तकाशी आया तब जा कर सडकों की हालत में सुधार हुई. गुप्तकाशी से श्री केदारनाथ जी के लिए हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हो जाती है और आसमान में हेलिकॉप्टर दिखना सामान्य बात है. आसमान में उड़ते हुए हेलिकॉप्टर को देख कर बच्चे हेलिकॉप्टर की सवारी करने के लिए जिद करने लगे थे. हमलोगों ने उनकी मांगों को अनदेखा कर आगे बढ़ने लगे. अभी कुछ ही दूर गए थे कि रास्ते के बिलकुल सटे एक हेलीपैड और उसका बुकिंग ऑफिस दिखा, तो जिज्ञासावश वहाँ उतार कर कल के लिए वन-वे  केदारनाथ के लिए टिकट की उपलब्धता पता करने लगे, तो उन्होंने कहा कि जाने एवं आने के लिए टिकट तो अभी मिल जाएगा परन्तु वन-वे  के लिए कल ही बता पाएंगे. वहाँ पता चला कि जिस हेलिकॉप्टर सेवा की ऑनलाइन बुकिंग हमलोग यात्रा शुरू करने से पहले कर रहे थे उससे लगभग 2000 रु. कम में आने-जाने का टिकट मिल रहा था. यहाँ एक बात का जिक्र करना जरूरी है कि इस यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अग्रिम बुकिंग हमने नहीं की थी, इसका मुख्य कारण यह था कि छोटा चार धाम यात्रा में मौसम के कारण यात्रा में बाधा से नियत समय पर ना पहुँचना. खैर! हमलोग टिकट का पता कर आगे बढ़े और करीब 7 बजे शाम को फाटा पहुँचे. अँधेरा होने वाला था और आंशिक रूप से हमलोगों का इरादा एक तरफ की यात्रा हेलिकॉप्टर द्वारा करने का हो चुका था तो हमलोग फाटा के एक होटल में रात्रि विश्राम के लिए रुक गए.

इस यात्रा के दौरान नजारों का लुत्फ़ आप नीचे दिए गए चित्रों से लें :











शेष  16-11-2018 के  अंक में .................................

भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :


आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश)

भाग -4 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा

भाग -5 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा

भाग -6 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन

भाग -7 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग –7) गंगोत्री धाम की यात्रा)

©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, November 7, 2018

MEME SERIES - 19


Biweekly Edition (पाक्षिक संस्करण) 07 Nov'2018 to 20 Nov'2018

मीम (MEME)

"यह एक सैद्धांतिक इकाई है जो सांस्कृतिक विचारों, प्रतीकों या मान्यताओं आदि को लेखन, भाषण, रिवाजों या अन्य किसी अनुकरण योग्य विधा के माध्यम से एक मस्तिष्क से दूसरे मस्तिष्क में पहँचाने का काम करती है। "मीम" शब्द प्राचीन यूनानी शब्द μίμημα; मीमेमा का संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ हिन्दी में नकल करना या नकल उतारना होता है। इस शब्द को गढ़ने और पहली बार प्रयोग करने का श्रेय ब्रिटिश विकासवादी जीवविज्ञानी रिचर्ड डॉकिंस को जाता है जिन्होने 1976 में अपनी पुस्तक "द सेल्फिश जीन" (यह स्वार्थी जीन) में इसका प्रयोग किया था। इस शब्द को जीन शब्द को आधार बना कर गढ़ा गया था और इस शब्द को एक अवधारणा के रूप में प्रयोग कर उन्होने विचारों और सांस्कृतिक घटनाओं के प्रसार को विकासवादी सिद्धांतों के जरिए समझाने की कोशिश की थी। पुस्तक में मीम के उदाहरण के रूप में गीत, वाक्यांश, फैशन और मेहराब निर्माण की प्रौद्योगिकी इत्यादि शामिल है।"- विकिपीडिया से साभार.

MEME SERIES - 19

By looking at this picture you might be having certain reaction in your mind, through this express your reaction as the title or the  caption. The selected title or caption of few people will be published in the next MEME SERIES POST.

इस तस्वीर को देख कर आपके मन में अवश्य ही किसी भी प्रकार के प्रतिक्रिया उत्पन्न हुई होगी, तो उसी को शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)के रूप में व्यक्त करें। चुने हुए शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION)को अगले MEME SERIES POST में प्रकाशित की जाएगी।

कुशल कामगार करे, सुरक्षित निर्माण कार्य !
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The next edition will be published on  NOVEMBER 21, 2018. If you have similar type of picture on your blog, leave a link of your post in my comments section. I will link your posts on my blog in the next edition. Thank you very much dear friends for all your valuable captions for MEME SERIES-18 . Your participation and thoughts are deeply appreciated by me. Some of the best captions are listed below.

अगला संस्करण 21 नवंबर , 2018 को प्रकाशित किया जाएगा। यदि आपके ब्लॉग पर इस तरह की कोई तस्वीर है, तो अपने पोस्ट का लिंक मेरी टिप्पणी अनुभाग में लिख दें। मैं अगले संस्करण में अपने ब्लॉग पर आपका पोस्ट लिंक कर दूंगा। मेरे प्रिय मित्रों, आपके सभी बहुमूल्य शीर्षक(TITLE) या अनुशीर्षक(CAPTION) के लिए धन्यवाद। MEME SERIES-18 के पोस्ट पर आपकी भागीदारी और विचारों ने मुझे बहुत प्रभावित किया, उनमें से कुछ बेहतरीन कैप्शन नीचे उल्लेखित हैं। 


MEME SERIES-18 के बेहतरीन कैप्शन



चलना ही है जिंदगी 
मै थमी थमी जिंदगी।...........................................................................Kusum Kothari
मैं अलबेली चली अकेली, ये पहाड़ियां मेरी सहेली......................................Abhilasha Chauhan
मुझे चलते जाना है...। .........................................................................Sweta sinha


Friday, November 2, 2018

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 7)


(भाग – 7)
 गंगोत्री धाम की यात्रा 

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आपने अभी तक “आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व, आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व”आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश) , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा , आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शनमें पढ़ा कि कैसे ब्लॉग एवं अन्य माध्यम से जानकारी जुटा कर मैंने यात्रा से संबंधित एक बारह दिवसीय कार्यक्रम की रूप-रेखा बनाई. जब विश्वसनीय वेब-साईट से पता चला कि सड़क एवं मौसम यात्रा के लिए अनुकूल है तब जाकर हमलोग ने अपनी यात्रा प्रारंभ की. “हर की पौड़ी”, ऋषिकेश, यमनोत्री, बड़कोट एवं उत्तरकाशी की मनोरम यादों को दिल में सहेज कर खाना खाने के बाद अपने अगले पड़ाव गंगोत्री की अलस-भोर में यात्रा करने हेतु रात्रि विश्राम के लिए अपने-अपने बिस्तर पर सो गए.    
अब आगे ....

मैंने इस यात्रा के दौरान महसूस किया कि अगर यात्रा में सम्मलित सभी सदस्य अनुशासित एवं समयनिष्ठ रहेंगे तभी आपकी यात्रा मंगलमय और सुखदायक रहेगा और सौभाग्य से इस यात्रा के दौरान बड़ों से लेकर छोटे बच्चे तक इस सूत्र का पालन कर रहे थे जिससे अभी तक हमलोगों की यात्रा सुखद और आरामदायक रही. इसी सूत्र को पालन करते हुए हम सबों ने सुबह साढ़े पाँच बजे गंगोत्री के की यात्रा शुरू कर दी. अब पहाड़ों के नज़ारे हमें आकर्षित तो कर ही रहे थे और साथ ही अलौकिक आत्मिक शांति भी प्रदान कर रह थे परन्तु जो उत्सुकता पहले थी उसमें कमी जरूर आ गई थी. उत्तरकाशी के मुख्य-बाज़ार से होते हुए लगभग आधे घंटे के बाद हमलोगों को मनेरी बाँध और वहाँ बसे बस्ती देखने को मिला. वहाँ का दृश्य बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रहा था और मैंने भी उस मनमोहक दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया, आप भी देखें.


इस छोटे चार धाम यात्रा की जानकारी जब इंटरनेट से हमलोग जुटा रहे थे तो पता चला था कि यात्री एवं वाहन का पंजीकरण कराना होता है. इसी क्रम में मुझे उत्तराखण्ड टूरिज्म का वेब साईट http://www.onlinechardhamyatra.com/ मिला जहाँ प्रति यात्री 50 रु. पंजीकरण शुल्क लिया जाता है. जब मैंने अपनी निजी संबंधों के माध्यम से जानकारी हासिल की तो पता चला कि निजी वाहन के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है और यात्री पंजीकरण हरिद्वार स्टेशन या रास्ते में कहीं पर हो जायेगी. तो हमलोगों ने अपना आधार कार्ड साथ में रख लिए. अभी तक तो कहीं भी किसी सरकारी कर्मचारी ने हमलोगों की पहचान की जाँच नहीं की थी परन्तु जैसे ही मनेरी बाँध को देखते हुए आगे बढ़े तो उत्तराखंड के सरकारी कर्मचारी ने एक डायवर्सन लगा रखा था. वहीँ पर एक मोबाइल वैन में यात्री पंजीकरण कंप्यूटर के द्वारा हो रहा था. जिसके लिए आधार कार्ड की जरूरत थी अर्थात बायोमैट्रिक के द्वारा यात्री पंजीकरण हो रहा था. स्वच्छ भारत अभियान के तहत टेंटों वाले शौचालय यात्रियों के लिए उपलब्ध थे. हम सभी ने वहाँ अपना-अपना पंजीकरण जो पूर्णतः निःशुल्क था, करा कर आगे बढ़े तो आगे ट्रैफिक पुलिस ने हमलोगों की जाँच की. इन सब में लगभग एक घंटा लग गया.
भागीरथी नदी एवं हिमालय पर्वत का साथ हमलोगों को उत्तरकाशी से लगातार मिल रहा था. नयनाभिराम दृश्यों को निहारते हुए हमारा सफ़र आराम से कट रहा था. रास्ते में गंगनानी का गर्म कुण्ड मिला. तीर्थयात्रियों का वहाँ हुजूम था. पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण वहाँ आधे घंटे के जाम का सामना करना पड़ा. उसके बाद हर्षिल पहुँचने से बीस मिनट पहले भेड़ों के झुण्ड ने लगभग दस मिनट रास्ता रोके रखा तब जाकर हमलोग हर्षिल पहुँचे. गंगनानी के बाद प्रकृति में एक नया आकर्षण जुड़ गया और वह था छोटे-बड़े झरनें. इस यात्रा में हर्षिल देखने का कार्यक्रम नहीं था परन्तु मंदाकिनी जलप्रपात जो सड़क के किनारे पर था, को देख कर सभी मचल उठे और वहाँ के आस-पास का स्थलों के सौन्दर्य का नैनों से रसपान किया. हर्षिल उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत और सुरम्य घाटियों में से एक है और इसे मिनी स्विट्ज़रलैंड के रूप में भी जाना जाता है। गंगोत्री मंदिर यहाँ से लगभग 22 किमी की दूरी पर है. यहाँ पर फ़िल्म “राम तेरी गंगा मैली” की शूटिंग हुई थी. हर्षिल में प्राकृतिक नजारों का लुफ़्त उठा कर हमलोगों ने होटल मधुबन में गर्मा-गर्म आलू के पराठों का जम कर नास्ता किया और गंगोत्री के लिए निकले, अभी  मिनट भी नहीं बिता था कि एक भागीरथी नदी के किनारे हेरिटेज हैली पैड और उसी के पास एक झरना को देख कर सभी फिर से मचलने लगे तो सभी को मैंने आश्वासन दिया कि हमलोग जब लौट कर आयेंगे तो यहाँ कुछ पल बिताएंगे और वैसा मैंने किया भी . आप तस्वीरों के माध्यम से हर्षिल का आनंद लें.















उत्तराखण्ड गढ़वाल क्षेत्र के पर्यटन स्थल में उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग द्वारा सुंदर लकड़ी के मंडप बनाकर उसके चारों दीवार पर हिंदी और अंग्रेजी में वहाँ के बारे में संक्षिप्त जानकारी एवं अपने विभाग का प्रचार लिखा होता है जो मुझे बहुत अच्छा लगा. ऐसा ही एक मंडप हर्षिल में दिखा जिस के एक दीवार पर लिखा था –“उत्तरकाशी जिले में यह गाँव और छावनी क्षेत्र गंगा भागीरथी नदी के किनारे हिन्दू तीर्थ गंगोत्री के मार्ग में है. हर्षिल को एक प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र के लिए भी जाना जाता है. यहाँ ब्रिटिशर विलसन ने 19 वीं शताब्दी में प्रथम सेब के पोधे का वृक्षारोपण किया.

हर्षिल एक अदुषित एवं अदृश्य उत्तराखंड का आभूषण है जो कि शांति एवं निस्तब्धता की आकांक्षा रखने वाले लोगो को हिमालय की गोद में आकर्षित करता है. घने देवदार के जंगल, भागीरथी नदी का बहता पानी, पंक्षियों की चहचहाहट, स्वास्थ्यवर्धक वातावरण एवं शांत माहौल इस छोटे से एकांत गंतव्य में प्रकाश डालते है. हर्षिल के आस-पास के अनेक क्षेत्रों के मार्गों में आप साहसिक ट्रेकिंग कर सकते है. हर्षिल खूबसूरत घाटी में स्थित है.” तस्वीरों के माध्यम से आप भी देखें:    




हर्षिल से जब हमलोग चले तो हलकी फुहारों वाली बारिश हो रही थी और यह मौसम गंगोत्री से लौटने तक कायम थी. सुबह 11 बजे हमलोग गंगोत्री पहुँचे . ठंडी हवा बह रही थी और भागीरथी नदी भी तीव्र वेग से बलखाती हुई बह रही थी. नदी का पानी बर्फ से भी ठंडा था. नदी में डुबकी लगाने की हिम्मत किसी की नहीं हो रही थी. वहाँ स्नान कर कपड़े बदल रहे एक सज्जन ने कहा "भाई साहब मेरा यह मग लीजिए और जल्दी-जल्दी तीन-चार मग पानी अपने सर के ऊपर डाल लीजिए. जब शारीर का तापमान पानी के तापमान के बराबर हो जाएगा फिर आपको नहाने में ठंड नहीं लगेगी." यह सुनकर मैंने हिम्मत की और सुझाव को पालन करते हुए स्नान किया. यकीन मानिए स्नान के बाद अद्भुत आनंद एवं आत्मिक शांति की अनुभूति हो रही थी. मेरे स्नान करने के बाद सभी हिम्मत करके स्नान किए. उसके बाद भागीरथ तपोस्थली के पास पूजा कर माँ गंगे के मंदिर का दर्शन किया और फिर हमलोग  खाना खाने के बाद दोपहर को दो बजे गंगोत्री से चल पड़े और  हेरिटेज हैली पैड हर्षिल रुकते हुए उत्तरकाशी के होटल पहुँचे.





यहाँ गंगोत्री और उत्तरकाशी के होटल में दो अलग-अलग घटनाओं का मुझे जिक्र करना जरूरी है. पहली घटना मानवीय मूल्यों से जुड़ी है - जब हम स्नान कर कपड़ा बदल रहे थे तो मैंने देखा कि भागीरथी नदी के दुसरे किनारे पर एक खच्चर दलदल में फँस गया था जिसे तीस-चालीस लोगों की कड़ी मशक्कत के बाद उस खच्चर को सकुशल निकाला गया. नीचे तस्वीर में देखें .

 


दूसरी घटना होटल में ठहरने वाले यात्रियों को सीख देने वाली है, तो हुआ यूँ कि जब हमलोग गंगोत्री के लिए रवाना हुए तो  रूम क्लीनिंग के लिए कमरे की  चाभी होटल वाले को दे  दिए. जब हमलोग गंगोत्री से वापस आए तो सभी फ्रेश हो कर खाना खाने डायनिंग हॉल जाने लगे तो मैंने कहा की आपलोग चलो मैं फ्रेश हो कर आता हूँ . सभी चले गए और मैं कमरे का कुंडा लगाकर बाथरूम में चला गया. चूँकि कमरे में कोई नहीं था तो जल्दबाजी में बाथरूम का दरवाजा खुला रह गया . जब मैं बाथरूम में था तो लगा कि कोई दरवाजा खोल रहा है. मैंने सोचा, शायद हममें से कोई आया होगा इसलिए नॉब से दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है. मगर किसी ने आवाज नहीं लगाई तो मैंने सोचा, शायद खाना लग गया होगा और वे मुझे बुलाने आए होंगे. इस लिए जल्दी से मैं बाथरूम से बाहर निकलते ही सामने का नज़ारा देख कर मेरे होश उड़ गए. उसी होटल का रूम सर्विस बॉय जिसकी उम्र लगभग 15-16 साल की होगी, वह मेरे पत्नी के पर्स की तलाशी ले रहा था. मुझे बहुत गुस्सा आया और मैंने उसे रंगे हाथों पकड़ा और गुस्से में पीटने वाला ही था कि उसकी दायनिए स्थिति को देख कर हाथ स्वतः रुक गया. सामान्यतः ऐसी स्थिति में मैं निष्ठुर हो जाता हूँ, पर न जाने क्यूँ मैं उसे समझाने लगा. फिर उसे पकडे हुए स्थिति में इण्टरकॉम से अपने भाई को कमरे में भेजने को कहा. भाई को समझ में कुछ नहीं आ रहा था. उसके आने में विलंब होने पर मैं उस लड़के का हाथ पकड़ कर जब डायनिंग हॉल पहुँचा तो सबके होश उड़ गए पर उनको माजरा समझ नहीं आ रहा था. जब विस्तार में सभी को बात बताई तो वहाँ के होटल स्टाफ उस लडके की तरफ से माफ़ी माँगने लगे. हम लोग भी धार्मिक यात्रा पर निकले थे अतः इस मामले को ज्यादा तूल नहीं दिए और कमरे में सोने चले आए परन्तु नींद तो कोसों दूर थी. 
इस घटना के पीछे जो गतिविधि हुई वह यह है कि वह लड़का पहले नॉब से चेक किया कि दरवाजा लॉक है की नहीं जिससे यह पता चल सके कि अंदर कोई है तो नहीं फिर वह पूर्व-नियोजित रूप से रूम क्लीनिंग के समय ही खिड़की की छिटकनी खोल रखा था जिससे वह कमरे में प्रवेश किया. शिक्षा यह लेनी है कि जब आप कमरे में रहें या लॉक कर के कहीं जाएँ तो खिड़की और सभी दरवाजे अवश्य जाँच लें कि सब सही तरह से बंद है.

शेष  09-11-2018 के  अंक में .................................

भाग -1  पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :
“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 1) यात्रा पूर्व

भाग -2 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

“आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 2) यात्रा पूर्व


भाग -3 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :


आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 3)  हरिद्वार (प्रथम पड़ाव एवं विधिवत रूप से चार धाम यात्रा का श्री गणेश)

भाग -4 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 4)  लक्ष्मण झुला दर्शन एवं बड़कोट की यात्रा

भाग -5 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

एवं आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 5)  यमनोत्री धाम की यात्रा

भाग -6 पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें :

आओ छोटा चार धाम यात्रा पर चलें – (भाग – 6) उत्तरकाशी की यात्रा एवं विश्वनाथ मंदिर और शक्ति मंदिर दर्शन

©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"