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Tuesday, March 26, 2013

अपनी -अपनी होली

इंटरनेट से लिया गया है।







अपनी -अपनी होली 

रंग-बिरंगी होली आई,
सबके रंग निराले भाई।

नेता जी की टोली आई,
आपस में कीचड़ उछाले  भाई।

भ्रष्टाचारियों ने उधम मचाई ,
रंगे हाथों पकड़े गए भाई। 

चोरों ने की खूब हाथ सफाई,
पकड़े गए,चेहरे का रंग उड़ गया भाई।

मिलावटी राम ने की खूब कमाई,
रंग तक को नहीं छोड़ा भाई।

आम आदमी का क्या कहना भाई,
तिलक लगाकर होली मनाई।
                                            -राकेश  कुमार श्रीवास्तव 


आप  सब को होली की ढ़ेर  सारी  शुभकामनाएँ !

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Friday, March 8, 2013

मोहब्बत


TAKEN FROM INTERNET 










The UN theme for International Women's Day 8th MARCH'2013 is 
"A promise is a promise: Time for action to end violence against women,"

मोहब्बत 

ऐसे ही, बस यूँ ही,
दिल तुमसे, लगा बैठा।

जैसे भी, तुम चल दी,
कदमों से ताल, मिला बैठा।

कैसे भी, तुम को मैं,
जीवन साथी अपना, बना बैठा।

वैसे ही, जीवन को,
सात रंगों से मैं, सजा बैठा।

तो जिंदगी, कटने लगी,
जैसे सपनों को पर, लगा बैठा।

जैसे ही,तुम बिछड़ी ,
खुद को मैं, लुटा बैठा।


सासें भी,अब थम गई,
कब्र पे तेरे, मैं आ बैठा।

मिलने की, चाहत में,
चाँद -सितारों के पार, मैं आ बैठा।

जैसे ही,तुम मिल गई,
मैं फिर से होश, गवां बैठा।


ऐसे ही, बस यूँ ही,
दिल तुमसे लगा बैठा।

-राकेश कुमार श्रीवास्तव 


Thursday, February 21, 2013

इल्तिजा


फोटो एवं ग्राफ़िक्स -राकेश कुमार श्रीवास्तव (R. K. SRIVASTAV)
   




















 इल्तिजा 

दिल में बस गए हो तुम,
यूँ  मुझसे  रूठा  न करो।

मेरी जां, जान निकल जायेगी ,
यूँ बेरुखी से देखा न करो।

तेरे सिवा नहीं कोई मेरा इस दुनियाँ में,
यूँ सरेआम बदनाम न करो।

मैंने माना  है तुझे अपना किनारा, 
यूँ मुझसे मुँह मोड़ा न करो।

जिंदगी में खुशियाँ हैं तेरे दम पे,
यूँ मेरे ख्वाब को तोड़ा न करो।

जीती हैं मछलियाँ, कभी पानी के बगैर ,
यूँ मेरे मरने का इंतजाम न करो।

जाओ!बस इतनी सी इल्तिजा है मेरी,
यूँ मेरी  मोहब्बत को शर्मसार न करो।


"The United Nations' (UN) International Mother Language Day"

                     "yearly celebrates February 21"


                                                     -राकेश कुमार श्रीवास्तव 

Thursday, February 14, 2013

सरस्वती वंदना

फोटो एवं ग्राफ़िक्स -राकेश कुमार श्रीवास्तव 









सरस्वती वंदना

माँ सरस्वती , माँ सरस्वती ,
हम कर रहें , तेरी स्तुति .
माँ सरस्वती , माँ सरस्वती ,
हम कर रहें , तेरी स्तुति .

मेरे चारो ओर,अंधकार है,
चिंताएं नाना प्रकार हैं.
तम को तू कर दे,नाश माँ,
ज्ञान की जला , माँ तू ज्योति.

माँ सरस्वती , माँ सरस्वती ,
हम कर रहें , तेरी स्तुति .

मैं घिरा हूँ माँ, शोक-संताप से
मैं जल रहा , वेदना की आग से.
माँ बजा, वीणा से मधुर रागनी .
दे दे माँ, चित्त को निर्मल शांति.

माँ सरस्वती , माँ सरस्वती ,
हम कर रहें , तेरी स्तुति .

सही-गलत में है, मन फँसा,
बहुत दयनीय है, मेरी दशा .
माँ! गुण हंस जैसा मुझको दे,
माँ! दे तू सत्य की अनुभूति.

माँ सरस्वती , माँ सरस्वती ,
हम कर रहें , तेरी स्तुति .

तेरी कृपा, मुझपे हो ऐसी माँ,
मैं जिउँ , कमल समान माँ.
वाणी हो मेरी, तेरी वीणा जैसी,
मेरा चित्त चमके, जैसे तेरा मोती.

माँ सरस्वती , माँ सरस्वती ,
हम कर रहें , तेरी स्तुति .

बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आप सब को शुभ कामनाएँ, माँ सरस्वती आप सब पर कृपा बनाएँ रखें.
-राकेश कुमार श्रीवास्तव 

Wednesday, January 30, 2013

भजन

GRAPHICS DESIGN BY R. K. SRIVASTAVA













         भजन 

राम  कहें  या  ईशु  कहें ,
अल्लाह कहें या वाहेगुरु।
सबका मतलब, एक है यारों,
कुछ भी कहें, सब एक है वो।।

दीन-दुखियों के, वो रखवाले ,
हर शै   में  है ,  उसका नूर ।
उनको जब भी, दिल से पुकारो,
पास  मिलेंगे ,  हर - पल  वो ।।

करुणा दया और प्यार है जिसमें,
कृपा  अपनी  बरसाते  है  उस पे।
बीच भँवर में, जब नैया डूबे,
माँझी  बन ,  पार लगाते वो।।

प्यार से मिलकर, हम सब मनाएँ,
सभी    धर्म    के ,   त्योहारों   को।
हर मज़हब को, प्यार से देखो,
सभी   जगह  ,   रहता  है  वो।।

क्षेत्र, भाषा, जाति  और धर्म में ,
मत   बाटों  ,  अपने  आप  को।
नफ़रत की दीवार को तोड़ो,
हर  दिल  में,  बसता  है वो।।

शै=चीज़, वस्तु 
                            -राकेश कुमार श्रीवास्तव