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Friday, August 10, 2018

भाखड़ा-नंगल डैम यात्रा


पुनरुत्थान भारत का नया मंदिर - भाखड़ा-नंगल डैम की यात्रा 
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“मुख्य पर्यटन स्थल  के भ्रमण हेतु जब कोई पर्यटक कार्यक्रम बनाता है तो उसकी कोशिश रहती है कि आस-पास के क्षेत्रों का भी अवलोकन कर लिया जाए, परन्तु कभी-कभी मुख्य क्षेत्र के अवलोकन के साथ अन्य क्षेत्र के अवलोकन  करने का मौसम नहीं भी रहता है फिर भी उसके मन में होता है कि जब यहाँ तक आ ही गए है तो वहाँ एक बार जा कर देखने में हर्ज क्या है ? और जब वहाँ जाता है तो कुछ खास नहीं देख पाने के अफ़सोस के साथ दुबारा उस स्थल पर आने का अपने आप को वचन देता है जो संभवतः उस स्थल पर आना कभी संभव नहीं हो पाता है”।

उपरोक्त कथन एक पर्यटक के भ्रमण कार्यक्रम में अपने लोभ को न संभाल पाने का एक उदाहरण है अब मैं आपसे  अपने दुसरे लोभ के बारे में चर्चा करना चाहूँगा। पर्यटन स्थल के भ्रमण का  कार्यक्रम बनाते समय, एक पर्यटक की कोशिश रहती है कि यात्रा मार्ग का नक्शा क्लोज्ड सर्किट में हो और इसी लालच का परिणाम है कि मैं आज आपके सामने इस यात्रा-वृतांत को आपके समक्ष प्रस्तुत कर पा रहा हूँ। 

मेरी श्रीमती जी की इच्छा हुई कि सुबह चलकर हिमाचल प्रदेश में स्थित माता नैना देवी जी  के दर्शन कर शाम तक घर लौट आयें।  मेरे निवास स्थान से माता नैना देवी जी के मंदिर की दूरी लगभग 150कि.मी. है अर्थात आना-जाना कुल 300कि.मी.और जाना भी अपने निजी वाहन से था तो मैं आस-पास के दर्शानिये स्थालों के अवलोकन का लोभ संभाल न सका और मैंने एक  हेक्टिक प्रोग्राम बना डाला जो निम्न प्रकार से था :
 मेरे निवास स्थान से भाखड़ा-नंगल डैम  127कि.मी.
 भाखड़ा-नंगल डैम से माता नैना देवी जी के मंदिर की दूरी 33कि.मी.
माता नैना देवी जी के मंदिर से आनंदपुर साहिब 24कि.मी.
आनंदपुर साहिब से मेरा  निवास स्थान 132कि.मी. अर्थात आना-जाना कुल 316कि.मी.
उपरोक्त प्रोग्राम में पूर्वनिर्धारित प्रोग्राम से दूरी का ज्यादा अंतर नहीं था परन्तु समय का अभाव अवश्य महसूस हो रहा  था । चिंता विशेष कर विरासत-ए-खालसा में प्रवेश का था, जिसका प्रवेश द्वार सायं चार बजे तक ही खुला रहता है।

खैर ! हमलोगों की यात्रा सुबह 5 बजे शुरू हुई और  गढ़शंकर से लगभग 7 कि.मी. बाद प्रकृति का नज़ारा बदल गया। चारों तरफ पहाड़ियाँ हमारे स्वागत में खड़ी थी एवं सडक के दोनों तरफ हरे-भरे पेड़ हमारी यात्रा को सुखद बनाने में सक्षम थे। जैसे ही यह नज़ारा हमारी आँखों से ओझल हुआ तभी कुछ देर बाद नंगल शहर की चमचमाती सड़क अपने पलक- पाँवड़े बिछाए हमलोगों का स्वागत कर रही थी। शहर के बीचो-बीच नंगल डैम अपने आन-बान और शान से खड़ी थी। हमलोग अपलक उस डैम को निहार रहे थे। हमें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या भाखड़ा-नंगल डैम यही है। क्योंकि हमें यह तो पता था कि भाखड़ा डैम को देखने हेतु परमिट की आवश्यकता होती है।  हमलोग डैम देखने के बाद एक ढाबा में नास्ता के लिए रुके तब हमें पता चला की यह नंगल डैम है और यहाँ से 1 कि.मी. की दूरी पर भाखड़ा-व्यास प्रबंधक के जन संपर्क कार्यालय से परमिट लेने के बाद 11 कि.मी. पर भाखड़ा डैम है। हमलोग झटपट नास्ता कर भाखड़ा डैम के लिए निकल पड़े। भाखड़ा बाँध के लिए परमिट सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 3:20 बजे तक मिलता है. इसके लिए आपके पास कोई भी सरकारी मान्य पहचान पत्र होना आवश्यक है। हमलोग परमिट ले कर आगे बढ़े।  परमिट एवं सामान्य सुरक्षा जाँच के बाद हम लोगों को आगे जाने की अनुमति सुरक्षाकर्मियों द्वारा दी गई। सुरम्य रास्तों से होते हुए जब हमने बहुत ही विशाल भाखड़ा बाँध को देखा तो उसके भव्यता को देखते ही रह गए। विशाल भाखड़ा बाँध के सामने सतलुज नदी, पानी की एक हरी पतली धार की तरह दिख रही थी। घुमावदार रास्तों के कारण भाखड़ा बाँध हमलोगों के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा था और कुछ दूर चलने पर काफी खुला स्थान मिला जहाँ एक तरफ बाँध के ऊपर जाने का रास्ता था परन्तु सुरक्षा कारणों से वह बंद था। उसी तरफ खाने-पीने  के लिए एक कैंटीन था और  दूसरी तरफ पं. जवाहलाल नेहरू की 50  फुट  ऊँची पीतल की मूर्ति भारत के नए युग के निर्माण के संकेत चिन्ह के रूप में खड़ी थी।  सुरक्षा कारणों के कारण पर्यटक यहाँ के अद्भुत दृश्य का आनंद नहीं ले पाते हैं। (नोट - अगर आप नास्ता या खाने के समय पर यहाँ पहुंचते हैं तो यहाँ के सुरम्य वातावरण में बैठ कर नास्ता या खाने का लुफ्त उठा सकते हैं। ) भाखड़ा बाँध से नैना देवी जाने के लिए परमिट की पुनः जाँच होती है। 23 कि.मी., भाखड़ा बाँध से नैना देवी की यात्रा गोबिंद सागर झील के सौंदर्य को निहारते हुए आराम से कट जाती है। 







नैना देवी मंदिर से गोबिंद सागर झील एवं रोप-वे का विहंगम दृश्य 
भाखड़ा-नंगल बहुउद्देश्यीय बाँध  के प्रमुख्य तथ्य :

1. भाखड़ा-नंगल बहुउद्देश्यीय बाँध  हिमाचल प्रदेश एवं पंजाब राज्य के सरहद पर स्थित है और सतलुज नदी पर भाखड़ा और नंगल में बने दो बाँधों के नाम पर रखा गया है।

2. नंगल बांध का निर्माण भाखड़ा बाँध के 13 कि.मी. नीचे की ओर नंगल (पंजाब ) में किया गया है। यह 29 मीटर ऊंचा, 305 मीटर लंबा और 121 मीटर चौड़ा एक सहायक बांध है, जो भाखड़ा बांध के दैनिक जल उतार-चढ़ाव को संतुलन बनाए रखने में एक जलाशय के रूप में कार्य करता है।

3. भाखड़ा बाँध संसार के ऊँचे कंक्रीट के सीधे ठोस बांधों में से एक है जिसकी ऊँचाई 225.55 मी. है जो दिल्ली के प्रसिद्ध क़ुतुब मीनार से तीन गुना है।

4. सतलुज नदी के पानी को गोबिंद सागर झील में जमा किया गया है जिसकी लम्बाई 96.56 कि.मी. है इसमें 9621मिलियन घन मी. पानी समा सकता है।

5. इस परियोजना के निर्माण में 15 वर्ष (1948-1963) लगे और 13000 मजदूर, 300 इंजीनियर, 30 विदेशी विशेषज्ञ दिन-रात काम करते रहे।

6. इसमे इतनी कंक्रीट लगी जिससे पुरे भूमध्य रेखा पर 8 फुट चौड़ी सड़क का निर्माण हो सकता था।

7. 1963 में इसकी लागत करीब 245 करोड़ रूपए थी।

8. भाखड़ा-नंगल बाँध की अनुमानित आयु 400 वर्षों से अधिक अंकित की गई है।

9. भाखड़ा नहर प्रणाली की लम्बाई लगभग 4830 कि.मी. है।

10. भाखड़ा नांगल परियोजना को 22 ऑक्टूबर 1963 में देश को समर्पित किया गया था।

विशेष अनुरोध : अगर आप माता नैना देवी मंदिर के दर्शन हेतु यात्रा करने का प्रोग्राम बना रहें हो तो साथ में इस आधुनिक भारत के मंदिर के दर्शन का आनंद अवश्य लें।

1. माँ नैना देवी मंदिर की यात्रा को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 
2. आंनदपुर साहिब की यात्रा - भाग 1-विरासत-ऐ-खालसा को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 
©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

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