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Friday, January 12, 2018

"माँ-पिता का साया"










"माँ-पिता का साया"

उनके पास है अनुपम उपहार,
जिनके पास माँ-पिता होते हैं,
इनका साया जिनके सर पर हो.
वे ही चैन की नींद सोते हैं। 

चिंता नहीं होती थी कभी भी,
कभी ना कोई कमी रहती थी,  
जाने कैसे, माँ की हाथों में,   
सदा पोटली जादू की रहती थी। 

जब भी हम परेशान होते हैं,
माँ को दुखड़ा कह, सो जाते हैं, 
माँ की ममता के आगे ही तो,
सदा सभी बच्चे ही रहते हैं। 

पिता का प्यार, बरगद की छाँव,  
उनकी शिक्षा है, जीवन की नाव,
आज जीवन खुशहाल है अपना,
उनके ही दम से खड़े है पाँव। 

पिता, आदर्श जीवन जीते हैं,
बच्चों के प्रेरणा स्रोत होते हैं,  
कितने भी हो वे परेशान, पर,  
घर की मांगों को पूरा करते हैं।   

जीवन भर उनकी सेवा करना,
संतान के सभी धर्म निभाना,
कर्ज ना कोई इनका उतार सका,
सदा ही इनके काम तुम आना। 

इनके चरणों में स्वर्ग होता है,
देव-तुल्य हैं, ये शास्त्र कहता है,
सेवा करें हमसब माता-पिता की,
यह मौका सभी को कहाँ मिलता है। 

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

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