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Friday, November 24, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 37 (Photography : Bird 37 )

Photography: (dated 18 10 2017 07:20 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

White wagtail

The white wagtail is a small passerine bird in the wagtail family. These species are found in most parts of Europe and Asia and in parts of North Africa. 
The white wagtail is an insectivorous bird, often living near open space and habitat and water. It makes nests in crevices in stone walls and man-made structures.
The white wagtail is the national bird of Latvia.

Scientific name:  Motacilla alba
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

धोबन पक्षी, वेग्टेल परिवार का छोटा गौरैया पक्षी है। यह प्रजातियां यूरोप और एशिया के अधिकांश क्षेत्रों में और उत्तर अफ्रीका के कुछ हिस्सों में पाए जाते है। 
धोबन पक्षी एक कीट खानेवाला पक्षी है, अक्सर यह खुले स्थान एवं निवास और पानी के आस-पास रहता है। यह पत्थर की दीवारों और मानव निर्मित संरचनाओं के दरारों में घोंसले बनाती हैं 
सफेद वेग्टेल लाटविया देश का राष्ट्रीय पक्षी है
वैज्ञानिक नाम: मोटाकिला अल्बा
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Assamese: বগা বালিমাহী; Bengali: ধলা খঞ্জন, সাদা খঞ্জন; French: Bergeronnette grise; Gujarati: દીવાળી ઘોડો; Hindi: धोबन; Malayalam: വെള്ള വാലുകുലുക്കി; Marathi: पांढरा धोबी, टेंबली; Nepali: सेतो टिकटिके; Tamil: வெள்ளை வாலாட்டிக் குருவி



-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Wednesday, November 22, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 36 (Photography : Bird 36 )

Photography: (dated 06  07 2016 11:30 AM )

Place : Zirakpur(chhatbir Zoo), Punjab, India

Great white pelican

The great white pelican also known as the eastern white pelican, rosy pelican or white pelican is a bird in the pelican family. It breeds from southeastern Europe through Asia and Africa, in swamps and shallow lakes.The great white pelican is a huge bird—only the Dalmatian pelican is averagely larger among pelicans.

Scientific name:  Pelecanus onocrotalus

Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

देवहंस को पूर्वी श्वेत देवहंस, गुलाबी देवहंस या श्वेत देवहंस के रूप में भी जाना जाता है, यह पेलिकन परिवार का एक पक्षी है। यह दक्षिणी यूरोप से एशिया और अफ्रीका के माध्यम में दलदलों और उथले झीलों में पाया जाता है। यह एक विशाल पक्षी है - केवल हौसिल बत्तख ही बत्तख पक्षी में या देवहंस से बड़ा है। 

वैज्ञानिक नाम: पेलेकन ओकोक्रोटुलस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव
अन्य भाषा में नाम:-
हिन्दी:देवहंस, Gujarati: ગુલાબી પેણ; Malayalam: വെൺ കൊതുമ്പന്നം; Nepali: ठूलो घाउँके हावासील; Oriya: ରାଜ ହଂସ




-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




Friday, November 17, 2017

हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य (भाग-1)



हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य (भाग-1)

मुख्य पर्यटन स्थल  के भ्रमण हेतु जब कोई पर्यटक कार्यक्रम बनाता है तो उसकी कोशिश रहती है कि आस-पास के क्षेत्रों का भी अवलोकन कर लिया जाए, परन्तु कभी-कभी मुख्य क्षेत्र के अवलोकन के साथ अन्य क्षेत्र के अवलोकन  करने का मौसम नहीं भी रहता है फिर भी उसके मन में होता है कि जब यहाँ तक आ ही गए है तो वहाँ एक बार जा कर देखने में हर्ज क्या है ? और जब वहाँ जाता है तो कुछ खास नहीं देख पाने के अफ़सोस के साथ दुबारा उस स्थल पर आने का अपने आप को वचन देता है जो संभवतः उस स्थल पर आना कभी संभव नहीं हो पाता है।

ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ परन्तु जिस स्थल को हम देखने गए उसका मौसम नहीं था परन्तु संतोष की बात यह थी कि यह स्थल मेरे निवास स्थान से मात्र 32  कि.मी. की दूरी पर है इस लिए इस पोस्ट का शीर्षक भाग- 1 के नाम से इस उम्मीद से प्रकाशित कर रहा हूँ कि उपयुक्त मौसम में यहाँ आ कर आपके लिए  इस शीर्षक का भाग- 2 भविष्य में प्रस्तुत करूँगा।

मैं 5 अक्टूबर 2017 राजपत्रित अवकाश एवं शरद ऋतू के प्रारंभ होने के कारण मैंने "हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य" जाने का निश्चय किया और निकल पड़े सुबह नास्ता करके हरिके पत्तन के लिए। मैं यहाँ एक बात का ज़िक्र करना चाहूँगा कि वेटलैंड या वन्यजीव अभ्यारण्य के बारे में स्थानीय लोगों को बहुत ही कम जानकारी होती है। इसलिए गूगल बाबा की सहायता ली और पता चला कि यहाँ घूमने का उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च है।

तो आइए ! आप को ले चलते है "हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य" जो पंजाब के फिरोजपुर ज़िले के अधीन है। यह स्थल जालंधर से 43.5  कि.मी., अमृतसर से 84  कि.मी. एवं फ़िरोज़पुर से 84 कि.मी.की दूरी पर स्थित है। सबसे नज़दीक रेलवे स्टेशन  मक्खू है। मक्खू रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से यह स्थल 10 कि.मी. उत्तर में स्थित है।  

8600 हेक्टेयर के विस्तारित क्षेत्र में फैले इस हरिके वेटलैंड को पक्षी अभयारण्य 1982 ई. में घोषित किया गया। यहाँ सर्दी के मौसम में पक्षियों की 200 प्रजातियां पायी जाती हैं। 

जब मैं जब हरिके पत्तन पहुँचा तो मेरा स्वागत सतलुज नदी के ऊपर बने पुल, हरिके बाँध  एवं इंदिरा गांधी नहर ने किया। मैं वहाँ के दृश्य को अपलक देख रहा था। इंदिरा गांधी नहर दक्षिण-पश्चिम में लगभग 640 किमी लंबी है।  राजस्थान के चुरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, बाडमेर और नागौर जैसे रेगिस्तानी जिलों के निवासियों को इस परियोजना से पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। प्रकृति एवं मानव निर्मित चमत्कार को एक साथ देख मैं मुग्ध हो रहा था। व्यास नदी यहाँ आकर सतलुज नदी में मिल जाती है। मुझे ये तो पता था कि "हरिके वेटलैंड एवं वन्यजीव अभ्यारण्य" यहीं कहीं आस-पास होना चाहिए था। अतः मैं बराज को पार कर सामने गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर, हरिके में प्रवेश किया। वहाँ का परिदृश्य विहंगम एवं मनोरम था। वहाँ के स्थानीय लोगों को भी पक्षी अभयारण्य के बारे में पता नहीं था तो मैंने गुरुद्वारा के जत्थेदार जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि पुल पार कर लगभग एक किलोमीटर की दुरी पर है।  हमलोग वहाँ पहुँचे तो वह वन विभाग का दफ्तर था। वहाँ "पक्षी अभयारण्य" के लिए परमिट मिलता है। वहाँ पता चला कि "गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर" के साथ वाला रास्ता ही "पक्षी अभयारण्य" को जाता है और अभी वहाँ पक्षी देखने को नहीं मिलेगा। अथार्त गूगल बाबा ने यहाँ धोखा दे दिया। उपयुक्त समय मध्य नवम्बर से फरवरी हैं।

हमलोग परमिट लेकर "पक्षी अभयारण्य" का भ्रमण किया। जो दिखा उसकी कुछ तस्वीरें आप भी देखें। 


हरिके बाँध 

 इंदिरा गांधी नहर



गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर


गुरुद्वारा ईशरधाम नानकसर का परिदृश्य 

गुरुद्वारा ईशरधाम, नानकसर का हॉल का प्रवेश द्वार  

पक्षी अभयारण्य के पास धान काट कर दाने को ट्रैक्टर में भरता मशीन  
पक्षी अभयारण्य की पगडंडियां 



पक्षी अभयारण्य में उड़ाते तोतों का झुण्ड 
पक्षी अभयारण्य का व्यू पॉइंट 


पक्षी अभयारण्य में शाह बाज़

पक्षी अभयारण्य में बन्दर महोदय 

पक्षी अभयारण्य में पानी के शैवाल निकालने की मशीन  




इस पोस्ट के भाग- 2  पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 
-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Wednesday, November 15, 2017

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा 

देखूँ चमकते चाँद-तारों को,
तेरे ही आँचल के साये में,
इस तरह जब भी मैं तुझे देखूँ,
शर्म से छुपता, चाँद बादल में।

शरद की ठंडी हवा का झोंका,
और तेरा उड़ता हुआ आँचल,
तुम्हें देख कर याद आता है,
आवारा बादल व चाँद चंचल।

तेरी ख़ामोशी को क्या समझूँ ?
खामोशी में सुंदर दिखती हो,
थोड़ी देर मुखर हो जाओ तुम,
कि मेरी अभिलाषा साकार हो।

तुम सिमटी आई हो, बाहों में,
दिल पर रहा नहीं मेरा काबू,
खुला आसमां, चाँद और तारे,
और मैं हो रहा था बेकाबू।

तुम थी, था बेकाबू मन मेरा,
थी साँसें,सुलगता जिस्म तेरा,
शरीर से आत्मा तक तब पहुँचा,
इक लंबा गहरा चुम्बन तेरा। 

इन्हीं सब यादों को सीने में,
यूँ ही संजोया मैंने अबतक,
इसी के सहारे जिंदा हूँ मैं,
देखें! ये साँस चलेगी कबतक। 
  

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-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Friday, November 10, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 35 (Photography : Bird 35 )

(See my photography and read story behind making nest by Baya Bird.

मेरी फोटोग्राफी देखें और सोनचिड़ी द्वारा घोंसला बनाने के पीछे की कहानी को पढ़ें।)

Photography: (dated 28 07 2017 07:15 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

BAYA WEAVER'S GOLDEN NEST COLONY


The breeding season of the Baya Weavers is during the rainy season. They make approximately 25 nests in a colony. The main requirements for the selection of their colony is the sources of food, the raw materials for nests, and the water. Their nests are hanging. The woven nest embellished by them is the best and unique. A male bird prepares a nest in about 20 days. During the construction of the nest, uses its strong beak to knit and knot. When nests are partially constructed, then men flutter their wings and hang up to their nests, displaying a nest to the female birds and passing it out. The female inspects the nest and gives a sign of approval to a male only when she likes it. After being a male and a female couple, the male builds the nest in full with the entrance gate. 
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

बाया या सोनचिड़ी के प्रजनन का मौसम वर्षा ऋतू है। ये लगभग 25  घोंसले का निर्माण एक कॉलोनी में करते है।इनके कॉलोनी के चुनाव का मुख्य आधार भोजन के स्रोत, घोंसले निर्माण के लिए सामग्री और पानी होता है। इनके  घोंसले लटकते हुए होते हैं। इनके द्वारा अलंकृत बुना घोंसला सबसे अच्छा एवं अद्वितीय होता है। एक नर पक्षी लगभग 20 दिनों में एक घोंसला तैयार करता है। घोंसले के निर्माण के दौरान बुनाई और गाँठ लगाने में अपने मजबूत चोंच का उपयोग करता है। घोंसले जब आंशिक रूप से निर्मित हो जाता हैं तब नर पक्षी  अपने पंखों को फड़फड़ाते हुए एवं अपने घोंसले तक लटकते हुए,  मादा पक्षियों को घोंसला दिखाने एवं उसे पारित करने के लिए अपना प्रदर्शन करते हैं। मादा घोंसले का निरीक्षण करती और पसंद आने पर ही एक नर को अपनी मंजूरी के संकेत देती है। एक नर और एक मादा जोड़े बन जाने के बाद, नर पक्षी प्रवेश द्वार सहित घोंसले को पूरा निर्माण करता है।
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव









©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"