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Wednesday, November 1, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 32 (Photography : Bird 32 )

Photography: (dated 27 07 2017 06 :30 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Cattle Egret

The cattle egret is a cosmopolitan species of heron (family ardhyadi) found in tropical, sub-tropical and warm temperate regions. It is the only member of the Monotypic genus Bubulcus. Despite similarities in the wings of genus Egretta, it is more closely related to the herons of Ardea. Originally found in parts of Asia, Africa and Europe.

Scientific name:  Bubulcus ibis
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

सुराखिया उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय और गर्म समशीतोष्ण क्षेत्रों में पाए जाने वाले बगुला का (पारिवारिक आर्डीडाई) की एक सर्वदेशीय प्रजाति हैं। यह मोनोटाइपिक जीनस बबुलकस का एकमात्र सदस्य है। जीनस एग्रेटा के ईग्रेट्स को पंखों में समानता के बावजूद, यह आर्देआ के बगुलों से अधिक मिलते है। मूल रूप से एशिया, अफ्रीका और यूरोप के हिस्सों में पाए जाते हैं। 

वैज्ञानिक नाम: बुबुलिकस इब्स
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Assamese:গো-বগ; Bengali: গো বগা; Bhojpuri: गाय बकुला, सुर्खिया बकुला; French: Héron garde-boeufs; Gujarati: ઢોર બગલો, બગલો; Hindi: सुराखिया; Kannada: ಗೋವಕ್ಕಿ; Malayalam: കാലിമുണ്ടി; Marathi: गायबगळा, ढोर बगळा; Nepali: वस्तु बकुल्ला; Sanskrit: पिंगलिका; Tamil: உண்ணிக்கொக்கு






©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




Saturday, October 28, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 31 (Photography : Bird 31 )



Photography: (dated 27 07 2017 06 :25 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Eastern great egret

The eastern great egret is a big bird with all white feathers. Its height can be 101 centimeters and weighing 950 grams. It is slightly smaller in size than the Great Blue or Gray Heron, and it is easily identified due to its yellow bills and black feet.
Scientific name:  Ardea alba modesta
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

बगुला एक बड़ा पक्षी है जिसमें सभी सफेद पंख होते हैं।इसकी ऊंचाई 101 सेंटीमीटर और वजन 950 ग्राम तक हो सकता हैं। यह ग्रेट ब्लू या ग्रे हेरोन से आकार में थोड़ी छोटी है इसके अलावा यह अपने पीले बिल और काले रंग के पैरों के कारण आसानी से पहचाना जाता है। 

वैज्ञानिक नाम: अरदे अलबा मेमेस्टा
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-
Assamese: বৰ বগ; French: Grande Aigrette; Hindi: बगुला; Kannada: ದೊಡ್ಡ ಬೆಳ್ಳಕ್ಕಿ; Malayalam: പെരുമുണ്ടി; Marathi: बगळा; Nepali: ठूलो सेतोबकुल्ला







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©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




Wednesday, October 25, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 30 (Photography : Bird 30 )

Photography: (dated 28 07 2017 06: 20 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Red-naped ibis

The red-naped ibis also known as the Indian black ibis or black ibis is a species of ibis found in the plains of the Indian Subcontinent. Unlike other ibises in the region it is not very dependent on water and is often found in dry fields a good distance away from water. It is usually seen in loose groups and can be told by the nearly all dark body with a white patch on the shoulder and a bare dark head with a patch of crimson red warty skin on the crown and nape. It has a loud call and is noisy when breeding. It builds its nest most often on the top of a large tree or palm.


Scientific name:  Pseudibis papillosa
Photographer :   Rakesh kumar srivastava

काला बाझ को काले आइबिस के रूप में भी जाना जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के मैदानों में पाए जाने वाले आइबिस की एक प्रजाति है। इस क्षेत्र में अन्य आइबिसों के विपरीत यह पानी पर बहुत निर्भर नहीं रहता है और अक्सर सूखी क्षेत्रों में और जलीय क्षेत्रों से दूर पाया जाता है। कंधे पर एक सफेद धब्बे के साथ गहरे भूरे रंग के  शरीर होता है और लाल रंग की चमकदार त्वचा एक मुकुट के रूप में नंगे काले सिर सुशोभित रहता है। प्रजनन करते समय यह एक ज़ोर से आवाज़  करता है और शोर करता है यह एक बड़े वृक्ष या ताड़ का पेड़ के शीर्ष पर घोंसला बनाता है।
वैज्ञानिक नाम: स्यूदीबीस पेपिलोसा
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Assamese: ক'লা আকুহী বগ; Gujarati: કાળી કાંકણસાર; Hindi: करांकुल, काला बाझ; Kannada: ಕರಿ ಕೆಂಬರಲು; Malayalam: ചെന്തലയൻ അരിവാൾകൊക്കൻ; Marathi: काळा शराटी, काळा कंकर; Nepali: कर्रा साँवरी; Punjabi: ਕਾਲਾ ਬੁੱਜ; Sanskrit: कृष्ण आटि, रक्तशीर्ष आटि; Tamil: கருந்தலை அரிவாள் மூக்கன்









©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"









Friday, October 20, 2017

विश्व गुरु भारत









विश्व गुरु भारत 
मिले विश्व-गुरु का ताज़ भारत को,
करते हैं हम सब अर्चन,
पर, हमें मालूम  हैं  कि हम ही हैं ,
इसकी राहों में अड़चन।

दोगली नीति हम सब को चाहिए,
हमें ना कोई कष्ट हो,
दूसरे की हो कोई भी गलती,
सज़ा न थोड़ी भी कम हो।

अपना बेटा करे दुष्कर्म कभी,
मुक़दमा होने न पाए
गर अपनी बेटी हुई पीड़ित तो,
दोषी,  फांसी चढ़  जाए।

करोड़ों लगा कर ही कोई यहाँ,
जब बन जाता है नेता,
समाज की भलाई वही करेगा,
कब समझेगी ये जनता?

शिक्षित मंत्री हम सब को चाहिए,
श्रेष्ठ भारत बनाने को
तो सभी कैसे तैयार हो गए,
अनपढ़ नेता चुनने को।

शिक्षा-स्वास्थ्य जब बने बाजारू,
देश कहाँ बच पाएगा?
विश्व-गुरु का ताज़ मिले भारत को,
ये कैसे हो पाएगा?

केवल अधिकारों के लिए लड़ना,
होगी ये बेईमानी,
अगर सपना पूरा करना है तो,
सभी कर्तव्यों का पालन करना,
ऐ मेरे हिन्दुस्तानी।
-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




Wednesday, October 18, 2017

भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य एवं अधिकार को जाने

भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य एवं अधिकार


मौलिक कर्तव्य 



मौलिक अधिकार


1. समता या समानता का अधिकार:
अनुच्छेद 14:
 विधि के समक्ष समता- इसका अर्थ यह है कि राज्य सही व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा तथा उन पर एक समान ढंग से उन्‍हें लागू करेगा. 
अनुच्छेद 15:
 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेद-भाव का निषेद- राज्य के द्वारा धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग एवं जन्म-स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा. 
अनुच्छेद 16:
 लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता- राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता होगी. अपवाद- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग. 
अनुच्छेद 17:
 अस्पृश्यता का अंत- अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए इससे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है.
अनुच्छेद 18:
 उपाधियों का अंत- सेना या विधा संबंधी सम्मान के सिवाए अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाएगी. भारत का कोई नागरिक किसी अन्य देश से बिना  राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है.

2. स्वतंत्रता का अधिकार:
अनुच्छेद 19-
 मूल संविधान में 7 तरह की स्वतंत्रता का उल्लेख था, अब सिर्फ 6 हैं: 
19 (a) बोलने की स्वतंत्रता.
 
19 (b) शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्रित होने और सभा करने की स्वतंत्रता.
 
19 (c) संघ बनाने की स्वतंत्रता.
 
19 (d) देश के किसी भी क्षेत्र में आवागमन की स्वतंत्रता.
 
19 (e) देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता. (अपवाद जम्मू-कश्मीर)
 
19 (f) संपत्ति का अधिकार.
 
19 (g) कोई भी व्यापार एवं जीविका चलाने की स्वतंत्रता.
 
नोट:
 प्रेस की स्वतंत्रता का वर्णन अनुच्छेद 19 (a) में ही है.
अनुच्छेद 20-
 अपराधों के लिए दोष-सिद्धि के संबंध में संरक्षण- इसके तहत तीन प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन है: 
(a)
 किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी. 
(b)
 अपराध करने के समय जो कानून है इसी के तहत सजा मिलेगी न कि पहले और और बाद में बनने वाले कानून के तहत.
(c)
 किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिय बाध्य नहीं किया जाएगा.
अनुच्छेद 21-
 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का सरंक्षण: किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है.
अनुच्छेद 21(क)
 राज्य 6 से 14 वर्ष के आयु के समस्त बच्चों को ऐसे ढंग से जैसा कि राज्य, विधि द्वारा अवधारित करें, निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा. ( 86वां संशोधन 2002 के द्वारा).
अनुच्छेद 22-
 कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी और निरोध में संरक्षण: अगर किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया गया हो, तो उसे तीन प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है: 
(1)
 हिरासत में लेने का कारण बताना होगा. 
(2)
 24 घंटे के अंदर (आने जाने के समय को छोड़कर) उसे दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया जाएगा. 
(3)
 उसे अपने पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार होगा.

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार 
अनुच्छेद 23:
 मानव के दुर्व्यापार और बलात श्रम का प्रतिषेध: इसके द्वारा किसी व्यक्ति की खरीद-बिक्री, बेगारी तथा इसी प्रकार का अन्य जबरदस्ती लिया हुआ श्रम निषिद्ध ठहराया गया है, जिसका उल्लंघन विधि के अनुसार दंडनीय अपराध है.
नोट: जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय सेवा करने के लिए बाध्य किया जा सकता है.
अनुच्छेद 24: बालकों के नियोजन का प्रतिषेध: 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, खानों या अन्य किसी जोखिम भरे काम पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है.

4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार-
अनुच्छेद 25:
 अंत:करण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता: कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है और उसका प्रचार-प्रसार कर सकता है.
अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता: व्यक्ति को अपने धर्म के लिए संथाओं की स्थापना व पोषण करने, विधि-सम्मत सम्पत्ति के अर्जन, स्वामित्व व प्रशासन का अधिकार है.
अनुच्छेद 27: राज्य किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है, जिसकी आय किसी विशेष धर्म अथवा धार्मिक संप्रदाय की उन्नति या पोषण में व्यय करने के लिए विशेष रूप से निश्चित कर दी गई है.
अनुच्छेद 28: राज्य विधि से पूर्णतः पोषित किसी शिक्षा संस्था में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी. ऐसे शिक्षण संस्थान अपने विद्यार्थियों को किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने या किसी धर्मोपदेश को बलात सुनने हेतु बाध्य नहीं कर सकते.

5. संस्कृति एवं शिक्षा संबंधित अधिकार: 
अनुच्छेद 29:
 अल्पसंख्यक हितों का संरक्षण कोई अल्पसंख्यक वर्ग अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है और केवल भाषा, जाति, धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवेश से नहीं रोका जाएगा.
अनुच्छेद 30: शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार: कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपनी पसंद की शैक्षणिक संस्था चला सकता है और सरकार उसे अनुदान देने में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेगी.

6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार: 
'संवैधानिक उपचारों का अधिकार' को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है.
 
अनुच्छेद 32:
 इसके तहत मौलिक अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए समुचित कार्यवाहियों द्वारा उच्चतम न्यायालय में आवेदन करने का अधिकार प्रदान किया गया है. इस सन्दर्भ में सर्वोच्च न्यायालय को पांच तरह के रिट निकालने की शक्ति प्रदान की गई है जो निम्न हैं: 
(a)
 बंदी प्रत्यक्षीकरण 
(b)
 परमादेश 
(c)
 प्रतिषेध लेख 
(d)
 उत्प्रेषण 
(e)
 अधिकार पृच्छा लेख 

(1) बंदी प्रत्यक्षीकरण:
 यह उस व्यति की प्रार्थना पर जारी किया जाता है जो यह समझता है कि उसे अवैध रूप से बंदी बनाया गया है. इसके द्वारा न्यायालय बंदीकरण करने वाले अधिकारी को आदेश देता है कि वह बंदी बनाए गए व्यक्ति को निश्चित स्थान और निश्चित समय के अंदर उपस्थित करे जिससे न्यायालय बंदी बनाए जाने के कारणों पर विचार कर सके. 
(2) परमादेश:
 परमादेश का लेख उस समय जारी किया जाता है, जब कोई पदाधिकारी अपने सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वाह नहीं करता है. इस प्रकार के आज्ञापत्र के आधार पर पदाधिकारी को उसके कर्तव्य का पालन करने का आदेश जारी किया जाता है. 
(3) प्रतिषेध लेख:
 यह आज्ञापत्र सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय द्वारा निम्न न्यायालयों तथा अर्द्ध न्यायिक न्यायाधिकरणों को जारी करते हुए आदेश दिया जाता है कि इस मामले में अपने यहां कार्यवाही न करें क्यूंकि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है. 
(4) उत्प्रेषण:
 इसके दवरा अधीनस्थ न्यायालयों को यह निर्देश दिया जाता है कि वे अपने पास लंबित मुकदमों के न्याय निर्णयन के लिए उससे वरिष्ठ न्यायालय को भेजें. 
(5) अधिकार पृच्छा लेख:
 जब कोई व्यक्ति ऐसे पदाधिकारी के रूप में कार्य करने लगता है जिसके रूप में कार्य करने का उससे वैधानिक रूप से अधिकार नहीं है न्यायालय अधिकार-पृच्छा के आदेश के द्वारा उस व्यक्ति से पूछता है कि वह किस अधिकार से कार्य कर रहा है और जब तक वह इस बात का संतोषजनक उत्तर नहीं देता वह कार्य नहीं कर सकता है.