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Friday, October 20, 2017

विश्व गुरु भारत









विश्व गुरु भारत 
मिले विश्व-गुरु का ताज़ भारत को,
करते हैं हम सब अर्चन,
पर, हमें मालूम  हैं  कि हम ही हैं ,
इसकी राहों में अड़चन।

दोगली नीति हम सब को चाहिए,
हमें ना कोई कष्ट हो,
दूसरे की हो कोई भी गलती,
सज़ा न थोड़ी भी कम हो।

अपना बेटा करे दुष्कर्म कभी,
मुक़दमा होने न पाए
गर अपनी बेटी हुई पीड़ित तो,
दोषी,  फांसी चढ़  जाए।

करोड़ों लगा कर ही कोई यहाँ,
जब बन जाता है नेता,
समाज की भलाई वही करेगा,
कब समझेगी ये जनता?

शिक्षित मंत्री हम सब को चाहिए,
श्रेष्ठ भारत बनाने को
तो सभी कैसे तैयार हो गए,
अनपढ़ नेता चुनने को।

शिक्षा-स्वास्थ्य जब बने बाजारू,
देश कहाँ बच पाएगा?
विश्व-गुरु का ताज़ मिले भारत को,
ये कैसे हो पाएगा?

केवल अधिकारों के लिए लड़ना,
होगी ये बेईमानी,
अगर सपना पूरा करना है तो,
सभी कर्तव्यों का पालन करना,
ऐ मेरे हिन्दुस्तानी।
-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"




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