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Tuesday, March 26, 2013

अपनी -अपनी होली

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अपनी -अपनी होली 

रंग-बिरंगी होली आई,
सबके रंग निराले भाई।

नेता जी की टोली आई,
आपस में कीचड़ उछाले  भाई।

भ्रष्टाचारियों ने उधम मचाई ,
रंगे हाथों पकड़े गए भाई। 

चोरों ने की खूब हाथ सफाई,
पकड़े गए,चेहरे का रंग उड़ गया भाई।

मिलावटी राम ने की खूब कमाई,
रंग तक को नहीं छोड़ा भाई।

आम आदमी का क्या कहना भाई,
तिलक लगाकर होली मनाई।
                                            -राकेश  कुमार श्रीवास्तव 


आप  सब को होली की ढ़ेर  सारी  शुभकामनाएँ !

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