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Tuesday, August 11, 2015

AE DIL HAI MUSHKIL

चित्र http://aedilhaimushkil.com/   से साभार 











(FILM KE TITLE PAR GEET LIKHANE KI KOSHISH KI HAI.)

ऐ दिल है मुश्किल


ऐ दिल है मुश्किल,
वो कहती है आ गले मिल.
मगर तू धड़कता है किसी और के लिए,
जो तेरे साँसों में है शामिल।

उसकी कशिश में है फंसा तू,
कितना समझाऊ तुझे, न समझे तू,
शोख चंचल अदा उसकी गजब है,
उसे भी नहीं चाहता छोड़ना तू। 

दोनों चाहती है तुझे दिलों-जां से,
इसलिए रहते हो तुम परेशां से,
मगर दोनों को कुछ बोला, भेद राजे-दिल का खोला,
तो गिर जाओगे दोनों की नज़र से। 

ऐ दिल है मुश्किल,
तेरा जीना हुआ बोझिल,
तुझे राहत तभी मिलेगी,
जब दूसरी न हो, ऐ मेरे दिल

ऐ दिल है मुश्किल,
जरा संभल जा ऐ मेरे दिल,
ये कहना बड़ा आसां है,
तेरी राह में है बड़ी मुश्किल.

अब कुदरत करेगा कोई उपाय.
जो तुझे इस मुश्किल से बचाए,
तेरे हाथ अब कुछ भी नहीं है,
तो फिर क्यूँ तू यूँ ही घबड़ाए.

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, July 22, 2015

आवारा आशिक


Picture from  https://www.mihai-medves.com 

आवारा आशिक

समेट लो दामन में मुझको, मैं बिखड़ा हुआ हूँ,

सहारा मुझको दे दो तुम, अंदर से टुटा हुआ हूँ.


बे-वजह तुम से मिला और मेरा ये हाल हुआ,

पहले आवारा बादल सा, मैं जीवन जीता रहा हूँ.


मुझे देख कर दहशत में जीते थे लोग,

अब उन्हीं के ठोकरों पर, मैं जी रहा हूँ.


बहुत ही कठिन है शराफ़त से जीना,

तेरी सोहबत के ख़ातिर, मैं ये कोशिश कर रहा हूँ.


मुफ़लिसी में जीना कोई मुश्किल नहीं है,

बेबसी में जीना है कैसा, मैं अब समझ रहा हूँ.


हौसलों के आगे असफलता कब तक टिकेगी,

जैसा चाहा था उसने वैसा, मैं अब बन गया हूँ.


कुछ भी बन जाना ये मेरे हाथ में है “राही”

वो मेरी बनेगी एक दिन, मैं इंतज़ार कर रहा हूँ.

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"



Wednesday, May 27, 2015

नई पीढ़ी










नई पीढ़ी

रुको! सुन लो मेरी बात,
मैं जानता हूँ कि तुम नहीं मानोगे,
सुन लोगे मेरी बात बुजुर्ग मानकर,
लेकिन करोगे अपनी मन-मर्जी,
और पछताओगे समय निकल जाने पर,
जैसे, आज मैं सोचता हूँ,
क्यों नहीं मैंने मानी,
अपने बुजुर्गों की बात!

मैं मानता हूँ पीढ़ी के फासले को,
और मानता हूँ हमदोनों के सोचने के अंतर को,
पर शाश्वत सत्य कभी बदलते हैं भला,
जीवन शैली हमदोनों की जुदा हो सकती है,
मगर सफलता के सूत्र भी कभी बदलते हैं भला,
और छल-कपट से कभी सफल हो भी जाओ,
तो क्या तुम कभी बदल पाओगे,
समाज के घिनौने चेहरों को,

ऐसा नहीं है कि मैंने सफलता प्राप्त नहीं की,
और ऐसा भी नहीं है कि तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी,
फर्क है तो बस मापदंड का,
जी रहा होता और खुशहाल ज़िन्दगी,
अगर मैंने मानी होती,
अपने बुजुर्गों की बात!

इसलिए सुन लो मेरी बात,
युवा हो तुम ! है तुम में अनंत ऊर्जा,
हो जाओ तुम उश्रृंखल,
केवल मौज-मस्ती के लिए,
पर ध्यान रहे!
उससे अहित न हो दूसरों का,
शेष ऊर्जा को खर्च करो दिल खोल कर,
जो काम आए अपने और समाज के नव-निर्माण में,
मैं नहीं कहता कि तुम सभी भटके हुए हो,
मेरी सलाह उनके लिए जो युवा है आम,
रुको! सुन लो मेरी बात.
जिनसे मैं भी सीखता हूँ,
ऐसे युवाओं को पहुंचाना मेरा भी सलाम!

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Tuesday, May 19, 2015

Simran Simmi Bhajan - 01



मेरी बड़ी दीदी द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध किया और और छोटी बहन द्वारा गाया ये भजन संग्रह पसंद आये या इसे खरीदना चाहे तो सूचित अवश्य करें.- आपका राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

Wednesday, May 13, 2015

विरह वेदना











      विरह वेदना



ज़िन्दगी में ये कैसा मोड़ आया,
जो सबसे प्यारा था उसे छोड़ आया.

वो प्यारा था, ये तब मैंने जाना,
जब उसे उस मोड़ पर छोड़ आया.

आँखों में समुन्दर, सीने में बवंडर,
रख सीने पर पत्थर, उसे छोड़ आया.

न मैंने कुछ कहा, न कुछ उसने कहा,
मीठी यादों के सहारे, उसे छोड़ आया.

जीवन कब रुका है जो अब रुकेगा,
मगर अपना सब कुछ वहीँ छोड़ आया.

न मिलेंगे कभी, ऐसा है तो नहीं,
फिर भी गम है कि उसे छोड़ आया.

करेगा नाम रौशन मेरा, इसी आस पर,
कामयाबी की राह पर “राही”, उसे छोड़ आया.

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"