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Wednesday, September 9, 2015

मिलन-गीत


                        मिलन -गीत

लड़का-         ये सासें, ये धड़कन, थम सी गई है,
जब से नज़र मेरी, तुम से मिली है.
आ जा करीब आ जा,
मेरी नैनों की प्यास बुझा जा.
ये सासें, ये धड़कन, थम सी गई है,

तेरे चहरे पे क्यूँ रुकती है मेरी नज़र,
क्यूँ रहती है तू मेरे प्यार से बे-ख़बर,
दीवाना सा लगता हूँ, दिल मेरा जले,
तू आ जा मेरी बाहों में लग जा गले,
ये सासें, ये धड़कन, थम सी गई है,

ये रंगीन शाम, मदहोश होने लगी,
ये शाम, रात की बाहों में सोने चली,
तेरी नशीली आँखों का जाम पी लेने दे,
गुस्ताख़ी है लेकिन, इस पल को जी लेने दे,
ये सासें, ये धड़कन, थम सी गई है,

लड़की-         जब से नज़र मेरी, तुम से मिली है,
मेरी आँखें बस अब तुम्हें ढूढ़ती है,
ये आग अब दोनों तरफ ही लगी है.
तभी तो मुलाकातें अक्सर हो रही है,

आ जा करीब आ जा,
मेरी नैनों की प्यास बुझा जा.

दोनों-            ये सासें, ये धड़कन, थम सी गई है,
जब से नज़र मेरी, तुम से मिली है.
आ जा करीब आ जा,
मेरी नैनों की प्यास बुझा जा.
ये सासें, ये धड़कन, थम सी गई है,

- © राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

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