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Monday, October 15, 2018

मित्र मंडली -91



मित्रों , 
"मित्र मंडली" का  इकानवे  वाँ अंक का पोस्ट प्रस्तुत है।इस पोस्ट में मेरे ब्लॉग के फॉलोवर्स/अनुसरणकर्ताओं के हिंदी पोस्ट की लिंक के साथ उस पोस्ट के प्रति मेरी भावाभिव्यक्ति सलंग्न है। पोस्टों का चयन साप्ताहिक आधार पर किया गया है। इसमें दिनांक 08.10.2018  से 14.10.2018 तक के हिंदी पोस्टों का संकलन है।


पुराने मित्र-मंडली पोस्टों को मैंने मित्र-मंडली पेज पर सहेज दिया है और अब से प्रकाशित मित्र-मंडली का पोस्ट 7 दिन के बाद केवल मित्र-मंडली पेज पर ही दिखेगा, जिसका लिंक नीचे दिया जा रहा है : HTTPS://RAKESHKIRACHANAY.BLOGSPOT.IN/P/BLOG-PAGE_25.HTML मित्र-मंडली के प्रकाशन का उद्देश्य मेरे मित्रों की रचना को ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुँचाना है। आप सभी पाठकगण से निवेदन है कि दिए गए लिंक के पोस्ट को पढ़ कर, टिप्पणी के माध्यम से अपने विचार जरूर लिखें। विश्वास करें ! आपके द्वारा दिए गए विचार लेखकों के लिए अनमोल होगा। 
प्रार्थी 
राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"

मित्र मंडली -91  


(नोट : मेरे कई ब्लॉग अनुसरणकर्ता  मित्र का पोस्ट जो मुझे बहुत अच्छा लगता है परन्तु मैं उसे मित्र मंडली में सम्मलित नहीं करता क्यूंकि उनकी रचना पहले से ही लोकप्रिय होती है और समयाभाव के कारण मैं उनके पोस्ट पर टिप्पणी  भी नहीं कर पाता हूँ, इसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।), 

इस सप्ताह के पाँच रचनाकार 



तितली तूफ़ान


https://www.hindi-abhabharat.com.xn----ztd4gfj7aay8etcbep4p.com/2018/10/blog-post13.html


फुरसत की फितरत में ही नहीं होती है फुरसत फितरत और फुरसत से साहित्य भी नहीं बनता है



सुशील कुमार जोशी  जी


#Me Too

पंकज भूषण पाठक जी

जब किसी से कोई गिला रखना ...

 शशि गुप्ता जी 

"गृहस्थ, विरक्त और संत को अगर कोई आत्मसात किया तो मेरी नज़र में तुलसीदास जी हैं और बहुत हद तक यह लेख भी इस अनुभूति को व्यक्तिगत रूप से आत्मसात किया हुआ है, थोड़ा सा संशय है तो गृहस्थ होने के व्यक्तिगत अनुभव में . अवलोकन के आधार पर आप केवल अनुमान ही लगा सकते हैं . लेख में इमानदारी से लिखी व्यक्तिगत अनुभवों से आप भी लाभ लें ."

आशा है कि मेरा प्रयास आपको अच्छा लगेगा । आपका सुझाव अपेक्षित है। अगला अंक 22-10-2018  को प्रकाशित होगा। धन्यवाद ! अंत में ....






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