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Friday, September 29, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 26 (Photography : Bird 26 )

Photography: (dated 19 06 2017 06: 50 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Wire-tailed swallow

The wire-tailed swallow is a bird of a small passerine family. It has two subspecies: H. S. Smithy, which is found throughout Africa and H. S. Philifera, which is found in southern and southeastern Asia. Mainly it is a resident of Pakistan and northern India, but transfers to the south in the winter. The name of its breed is Hirundo, the Latin word for swallow. The name of this species is kept in memory of Christen Smith who remembers a Norwegian botanist and geologist.

Scientific name:  Hirundo smithii
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

अबाबील एक छोटे से गौरैया परिवार का पक्षी है। इसकी दो उप-प्रजातियां हैं: एच. एस. स्मिथी , जो पूरे अफ्रीका में पाया जाता है और एच. एस. फिलीफेरा, जो दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी  एशिया में पाया जाता है। मुख्य रूप से यह  पाकिस्तान और उत्तरी भारत इसका निवास है परन्तु  सर्दियों में दक्षिण की ओर स्थानांतरित हो जाती है। इसके जाती का नाम हिरंडो, निगलना(swallow) के लिए लैटिन शब्द है। इस प्रजाति का नाम स्मिथि, क्रिसमस स्मिथ के स्मृति में रखा गया है जो  एक नार्वेजियन वनस्पतिशास्त्री और भूविज्ञानी का स्मरण करता है।

वैज्ञानिक नाम: हिरंडो स्मिथि
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-

Hindi : अबाबील;  Bengali: তারলেজা আবাবিল; Gujarati: લેસર અબાબીલ; Kannada: ತಂತಿಬಾಲದ ಕವಲುತೋಕೆ; Malayalam: കമ്പിവാലൻ കത്രിക; Marathi: तारवाली पाकोळी, तारवाली भिंगरी, काडीवाली भिंगरी; Punjabi: ਤਾਰਪੂੰਝਾ


















©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Wednesday, September 27, 2017

पंजाब कला भवन, चंडीगढ़

पंजाब कला भवन, चंडीगढ़

रोज गार्डेन के पास एक एकड़ भूमि पर फैला कला भवन का निर्माण एवं पंजाब कला परिषद की स्थापना, डॉ. एम एस रंधवा  का सपना था जिसको उन्होंने मूर्त रूप दिया।  1979 से 1986 तक वे पंजाब कला परिषद के अध्यक्ष रहे। एक ही छत के नीचे कला, साहित्य और संस्कृति के सभी गतिविधियों के लिए स्थान मैंने पहली बार  देखा जिसका नाम है कला भवन जो चंडीगढ़ के सेक्टर - 16 में स्थित है । कला भवन में पंजाब कला परिषद, पंजाब संगीत नाटक अकादमी, पंजाब ललित कला अकादमी एवं पंजाब साहित्य अकादमी के दफ़्तर है। 

इसमें 3000  स्क्वायर फीट में फैला एक वातानुकूलित आर्ट गैलरी जिसका नाम पंजाब के मशहूर पेंटर सोभा सिंह के नाम पर है। 

पुरुषों और महिलाओं के लिए दो अलग-अलग ग्रीन रूम वाले एवं 300 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता वाला एक वातानुकूलित ऑडिटोरियम है जिसका नाम संस्थापक की स्मृति में  रंधावा  ऑडिटोरियम रखा गया है।यह सभागार नाटक और संगीत कार्यक्रमों के लिए आधुनिक प्रकाश और ध्वनि प्रणाली से सुसज्जित है।

साहित्यिक कार्यों के लिए 100 व्यक्तियों के  बैठने की क्षमता वाला एक लाउंज है।

बैठकों, सेमिनारों और सम्मेलनों के लिए 30 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता वाला एक वातानुकूलित समिति कक्ष  है।

300 व्यक्तियों की बैठने की क्षमता वाला एक ओपन एयर थियेटर है। 

कलाकारों और अन्य  मेहमानों को रहने के लिए 6 कमरे (4 वातानुकूलित और 2 डेजर्ट कूलर)  वाला अतिथि कक्ष है।  

भूमि तल पर एक पुस्तकालय का कमरा है जिसमें दैनिक समाचार पत्रों के साथ सुसज्जित कला और संस्कृति पढ़ने के लिए 3,000 से अधिक पुस्तकें हैं। 

इसके वास्तुशिल्प को देख कर इसे हेरिटेज भवन का दर्जा प्राप्त है। 

आइए ! तस्वीरों के माध्यम से इसे महसूस करें और समय मिले तो एक बार इसका दर्शन अवश्य करें। 
















-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Friday, September 22, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 25 (Photography : Bird 25 )

Photography: (dated 28 05 2017 06: 45 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Common nightingale


The common nightingale or simply nightingale , also known as rufous nightingale, is a small passerine bird best known for its powerful and beautiful song. It was formerly classed as a member of the thrush family Turdidae, but is now more generally considered to be an Old World flycatcherMuscicapidae. It belongs to a group of more terrestrial species, often called chats.
Scientific name:  Luscinia megarhynchos
Photographer   :  Rakesh kumar srivastava

बुलबुल (कलविंकक) एक छोटा पक्षी है जो अपने मधुर आवाज़ के लिए जाना जाता है। यह लाल दुम वाले बुलबुल से अलग है। 
वैज्ञानिक नाम: ल्यूसिनिया मीगर्दींचोस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव
अन्य भाषा में नाम:-
Bengali: পাপিয়া;  Gujarati: બુલબુલ; Hindi बुलबुल, कलविंकक; Kannada: ನೈಟಿಂಗೇಲ್; 
Malayalam: രാപ്പാടി; Marathi नाइटिंगेल; Nepali: बुलबुल



©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Wednesday, September 20, 2017

जय अपराधी बाबा की

 जय अपराधी बाबा की 

सर्वप्रथम जेल में सज़ा काट रहे सभी बाबाओं को साष्टांग प्रणाम अर्थात  सिर, हाथ, पैर, हृदय, आँख, जाँघ, वचन और मन इन आठों से युक्त होकर भूमि पर सीधे लेटकर मेरा प्रणाम। एक ही बात को बार-बार लिखने या कहने की विधा मैंने इन्हीं बाबाओं से सीखी है और यहाँ तो मजबूरी है कि एक तो बाबाओं की शैक्षणिक योग्यता कम है या हिंदी की कुछ शब्दों के भाव को नहीं जानते है। साष्टांग प्रणाम इन बाबाओं के भक्तों को भी, जो इन बाबाओं के विरुद्ध साक्ष्य होने के बाद भी अपनी भक्ति में कोई कमी नहीं रखी। इसके साथ ही मैं वैधानिक ढंग से क्षमा चाहता हूँ उन बाहुबली भक्तों से जो महाबली बन कर भारत के सम्प्रभुता को चुनौती देते आए है तो मैं किस खेत की मूली हूँ। 

वस्तुतः  इस हास्य-व्यंग का मूल उद्देश्य बाबाओं को महिमामंडित करने का है फिर भी अगर किसी को लगे कि मैंने इन महापुरुषों के प्रति गुस्ताख़ी की हो तो उन पाठकों से विनम्र निवेदन है कि इस आलेख को पुनः पढ़ कर अपनी प्रतिक्रिया बदलें या अपनी प्रतिक्रिया फिर भी ना बदल पाएं तो मेरे इस विशेष अनुरोध पर किसी नास्तिक से इस लेख के बारे में राय लें। 

इन बाबाओं के चरणों में अपना श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए मैं यह कहना चाहता हूँ कि आपलोग यूथ आइकॉन है. आपकी महिमा का डंका सम्पूर्ण सोशल मीडिया में बजता है। इस चराचर जगत में सबसे ज्यादा पैसा, शोहरत, आनंद और  रुतबा है तो इस बाबागिरी में है। अब वह दिन दूर नहीं जब कॉर्पोरेट जगत या आईआईटियन सुनियोजित ढंग से आपके ही रास्तों पर चल कर अतुल्य भारत का निर्माण कार्य में सहयोग देंगे। ऐसे भी आपका जीवन अनुकरणीय है क्योंकि आप हिन्दू शास्त्रों के अनुरूप जीवन व्यतीत करते है पहले आप किसी ना किसी गुरुकुल में रहते है। ज्ञान अर्जन के उपरांत आप गृहस्थ आश्रम वरण करते हुए अपने एवं अपने वंशजो के लिए अकूत सम्पति अर्जित करते है फिर अंगुलिमाल डाकू की तरह कुख्यात हो जाते है तो कोई जज रुपी बुद्ध आपको आध्यात्मिक राह दिखाते है और तब आप सभी सांसारिक मोह-माया को त्याग कर वानप्रस्थ आश्रम को वरण करते है और स्वं को जानने हेतु तपस्या करने के लिए जेल की सेवा लेते हैं। अंत में 20 से 25 वर्ष का वानप्रस्थ काल को भोग कर संन्यास आश्रम को वरण करेंगे इसी मनोकामना के साथ इस आलेख के समापन के पूर्व मैं कहना चाहता हूँ कि "हे भक्तों, बाबा अपने क्रम-संन्यास का भोग कर रहें है और मोक्ष की ओर अग्रसर है। अतः यह शोक की घडी नहीं है। इस स्वर्णिम अवसर को लपको और तुम भी बाबा बन जाओ। तुम्हें तो पता ही होगा कि इस सत्संग परिपाटी में एक बाबा के जाने के बाद अनेकों बाबाओं की उत्पत्ति होती है। इसलिए तुम सभी चिंताओं से मुक्त होकर बाबा बनने की प्रक्रिया में शामिल हो जाओ और परम पद को प्राप्त करो। भक्त ही तुम्हारा कल्याण करेंगे। जय अपराधी बाबा की। इति।।

-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"







Friday, September 15, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 24 (Photography : Bird 24 )

Photography: (dated 14 06 2017 06: 00 AM )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Crested or Changeable hawk-eagle 


The crested hawk-eagle or changeable hawk-eagle  is a bird of prey species of the family Accipitridae. Changeable hawk-eagles breed in the Indian subcontinent, mainly in India and Sri Lanka, and from the southeast rim of the Himalaya across Southeast Asia to Indonesia and the Philippines. This is a bird occurring singly (outside mating season) in open woodland, although island forms prefer a higher tree density. It builds a stick nest in a tree and lays a single egg. 
Scientific name:  Nisaetus cirrhatus
Photographer :   Rakesh kumar srivastava

क्रेस्टेड बाज़-ईगल या चेंजेबल बाज़-ईगल, एसिप्रिट्रिडे (शिकार प्रजाति) परिवार  की  का एक पक्षी है।
भारतीय उपमहाद्वीप में मुख्य रूप से भारत और श्रीलंका में, और दक्षिण पूर्व एशिया से इंडोनेशिया और फिलीपींस के दक्षिण-पूर्व हिमालय के  किनारे  ये  नस्ल पाए जाते हैं। यह खुली जंगलों में अकेले उड़ने वाला पक्षी है। यह एक पेड़ में एक छड़ी के आकर वाले घोंसले बनाता है और एक अंडा देता है।
वैज्ञानिक नाम: निसातिस सिर्रहातुस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-
Gujarati: મોર બાજ; Hindi: शाह बाज़; Malayalam: കിന്നരിപ്പരുന്ത്; Marathi: तुरेबाज व्याध, झेंडोरी गरुड (कोकण भाग); Nepali: शदलचील






©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Wednesday, September 13, 2017

SHE

 
          
               SHE

With broken pieces of what once were dreams.
Her soul was on fire and made terrible screams..
Her eyes were closed, her tears very fiery streams...

She's done, She's gone, She's no more.
Her boat has sailed Long ago from the seashore..
Now she's in a place new, with a white marble door...

She forgave everyone because her heart was pure.
But beware wrongdoers, for karma is for sure..
Once it takes hold of you, there's no cure...

©  Krishna Srivastava








Saturday, September 9, 2017

फोटोग्राफी : पक्षी 23 (Photography : Bird 23 )

Photography: (dated 09 06 2017 06: 35 AM & 23 07 2017 )

Place : Kapurthala, Punjab, India

Indian grey hornbill

The Indian grey hornbill  is a common hornbill found on the Indian subcontinent. It is mostly arboreal and is commonly sighted in pairs. It has grey feathers all over the body with a light grey or dull white belly. The horn is black or dark grey with a casque extending to the point of curvature of the horn. It is one of the few hornbill species found in urban areas in many cities where they are able to make use of large trees in avenues.

Scientific name:  Ocyceros birostris
Photographer :   Rakesh kumar srivastava


भारतीय ग्रे हॉर्नबिल भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले एक आम हॉर्नबिल है। यह ज्यादातर वृक्षों पर और आमतौर पर जोड़े में देखा जाता है। इसमें एक हल्के भूरे या मटमैले सफेद पेट के साथ पूरे शरीर में ग्रे पंख होते हैं। सींग आकार का चोंच काले या काले भूरे रंग के होते हैं जिसमें चोंच के वक्रता तक एक टोप होता है। यह कई शहरी क्षेत्रों में पाए जाने वाले कुछ प्रजातियों में से एक है जहां वे रास्ते में बड़े पेड़ों का उपयोग आश्रय के तौर पर करते हैं।
वैज्ञानिक नाम: ओसीसरोस बिरोसिस
फोटोग्राफर: राकेश कुमार श्रीवास्तव

अन्य भाषा में नाम:-
Bengali: ভারতীয় ধূসর ধনেশ; Gujarati: ચિલોત્રો; Hindi: धनचिड़ी, चलोत्रा, सेलगिल्ली, धनेश; Kannada: ಬೂದು ಮಂಗಟ್ಟೆ; Malayalam: നാട്ടുവേഴാമ്പൽ; Marathi: धनेश, राखी शिंगचोचा, मसपील (आदिवासी भाग); Nepali: सानो धनेश; Oriya: କୋଚିଲାଖାଇ; Punjabi: ਧਾਨ ਚਿੜਾ; Sanskrit: वार्ध्रीणास, मातृनिंदक; Tamil: இந்திய சாம்பல் இருவாச்சி















©  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"







Wednesday, September 6, 2017

तेरे बिन











तेरे बिन

जीना,
तेरे बिन जीना,
तेरे बिन जीना,
है मुश्किल मेरा।

मरना,
तेरे बिन मरना,
तेरे बिन मरना,
भी मुश्किल मेरा।

जीवन के पथ पर,
तेरा साथ मिला है।
कदम लड़खड़ाया,
तेरा हाथ मिला है।

रातें,
तेरे बिन रातें,
तेरे बिन रातें,
नहीं कटती मेरी।

सासें,
तेरे बिन सासें,
तेरे बिन सासें,
नहीं चलती मेरी।

तुम जो कहोगी,
वो मैं करूँगा।
जुदाई को मैं,
सह ना सकूँगा।

इस गीत को निचे दिए गए लिंक को क्लिक कर सुन सकते हैं।



-© राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"








Saturday, September 2, 2017

एक हसीना थी














अपराध पर आधारित एक रोमांचक कथा को
ग़ज़ल के माध्यम से कहने की कोशिश की है।
प्रतिक्रिया अवश्य दें - राही

एक हसीना थी

रग-रग से सभी को पहचानती थी वो,
किस के दिल में क्या है? जानती थी वो।

प्यार को ठुकरा कर, मशहूर हो गई,
दोस्त को ही रक़ीब, बना गई थी वो।

शमशीरें निकल पड़ीं, वो देखती रही,
हश्र क्या होगा इसका? जानती थी वो।

अंजाम कुछ भी, उसे फ़र्क नहीं पड़ता,
जीत उनकी तय थी, ये जानती थी वो।

हुस्न व इश्क में तकरार जब भी होगी,
हुस्न ही जीतेगा, ये जानती थी वो।

खंजर उसके सीने में, आँखें नम मेरी,
लहराकर मेरी गोद में, आ गिरी थी वो।

आँखें खुलीं थी उसकी, मैंने बंद की,
मौत पर भी अपनी, मुस्कुरा रही थी वो।

-©राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"