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Thursday, February 21, 2013

इल्तिजा


फोटो एवं ग्राफ़िक्स -राकेश कुमार श्रीवास्तव (R. K. SRIVASTAV)
   




















 इल्तिजा 

दिल में बस गए हो तुम,
यूँ  मुझसे  रूठा  न करो।

मेरी जां, जान निकल जायेगी ,
यूँ बेरुखी से देखा न करो।

तेरे सिवा नहीं कोई मेरा इस दुनियाँ में,
यूँ सरेआम बदनाम न करो।

मैंने माना  है तुझे अपना किनारा, 
यूँ मुझसे मुँह मोड़ा न करो।

जिंदगी में खुशियाँ हैं तेरे दम पे,
यूँ मेरे ख्वाब को तोड़ा न करो।

जीती हैं मछलियाँ, कभी पानी के बगैर ,
यूँ मेरे मरने का इंतजाम न करो।

जाओ!बस इतनी सी इल्तिजा है मेरी,
यूँ मेरी  मोहब्बत को शर्मसार न करो।


"The United Nations' (UN) International Mother Language Day"

                     "yearly celebrates February 21"


                                                     -राकेश कुमार श्रीवास्तव 
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